हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर दस महाविद्याओं की देवी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही विशेष कार्यों में सिद्धि पाने के लिए व्रत रखा जाता है। तंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्र उत्सव समान होता है।धार्मिक मत है कि गुप्त नवरात्र के दौरान दस महाविद्याओं की देवी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सभी जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं।
अतः भक्तजन नवरात्र के दौरान मां की कठिन भक्ति करते हैं। नवरात्र के दौरान मैया के दर्शन हेतु बड़ी संख्या में भक्तजन आसपास और प्रसिद्ध मंदिरों की यात्रा करते हैं। अगर आप भी मैया का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो विजयासन मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। आइए, विजयासन मंदिर के बारे में जानते हैं-
विजयासन माता की महिमा
विजयासन माता की महिमा निराली है। अपने भक्तों पर ममतामयी मां विशेष कृपा बरसाती हैं। उनकी कृपा से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। वहीं, विजयासन माता दुष्टों का संहार करती हैं। देश-दुनिया से भक्तजन माता के दर्शन के लिए मंदिर आते हैं। वहीं, नवरात्र के दौरान मंदिर में भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
कहां है विजयासन मंदिर?
यह मंदिर मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में एक पहाड़ी पर स्थित है। पहाड़ के शीर्ष स्थल पर विजयासन माता विराजती हैं। माता के दर्शन के लिए भक्तजनों को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। नवरात्र के दौरान विजयासन मंदिर के प्रांगण में मेले का आयोजन किया जाता है। हर साल बड़ी संख्या में भक्तजन मां के दर्शन के लिए सलकनपुर स्थित विजयासन मंदिर आते हैं। कहते हैं कि विजयासन मंदिर में देवी मां के दर्शन से न केवल मनोकामना पूरी होती है, बल्कि शत्रु भय से भी मुक्ति मिलती है।
कैसे पहुंचे मंदिर?
भक्तजन यातायात के सभी साधनों से सीहोर पहुंच सकते हैं। सीहोर में रेलवे स्टेशन है। आप रेल से सीहोर पहुंचकर सड़क मार्ग से सलकनपुर जा सकते हैं। वहीं, सीहोर का निकटतम एयरपोर्ट भोपाल है। इसके साथ ही आप इंदौर होकर भी विजयासन मंदिर जा सकते हैं। भक्तजन देश के किसी कोने से इन दोनों मार्ग के जरिए सलकनपुर पहुंच सकते हैं।
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments