गेहूं की फसल में दूसरा पानी लगाने के लगभग 20 से 23 दिन बाद तीसरा पानी लगाने का समय आता है। हालांकि, पानी देने से पहले मिट्टी की किस्म और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। यदि मिट्टी हल्की है, तो 15-16 दिन पर पानी दें, और यदि भारी मिट्टी है, तो 22-23 दिन पर। इस समय पाला और कड़ाके की ठंड पड़ रही है, इसलिए समय पर सिंचाई करना फसल को ठंड के नुकसान से बचाने के लिए भी आवश्यक है।
इस अवस्था (लगभग 60-70 दिन) में गेहूं में बालियां बनने की प्रक्रिया (Booting Stage) शुरू हो जाती है। बालियों की लंबाई और दानों की संख्या इसी समय तय होती है। फसल को इस समय वह पोषण देना चाहिए जो दानों के निर्माण में सहायक हो। इसके लिए प्रति एकड़ 12 किलो कैल्शियम नाइट्रेट (Calcium Nitrate) और उसमें मौजूद बोरॉन (Boron) का प्रयोग बहुत फायदेमंद होता है। इससे दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं, जिससे सीधे तौर पर पैदावार बढ़ती है।
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यदि आपकी गेहूं की फसल में पीलापन है, तो इसे दूर करने के लिए विशेष खाद की जरूरत होती है। नीचे की पत्तियों का पीलापन अक्सर नाइट्रोजन की कमी से होता है, जिसके लिए पानी के साथ यूरिया देना चाहिए। लेकिन यदि ऊपर की पत्तियां पीली हैं, तो 30 किलो यूरिया के साथ 5 किलो जिंक सल्फेट (33%) और 10 किलो मैग्नीशियम सल्फेट मिलाकर डालें। मैग्नीशियम और जिंक क्लोरोफिल के निर्माण में मदद करते हैं, जिससे फसल फिर से हरी-भरी और स्वस्थ हो जाती है।
जो किसान भाई खाद नीचे नहीं डाल पा रहे हैं, वे एनपीके 0:52:34 के साथ 100 ग्राम बोरॉन मिलाकर स्प्रे भी कर सकते हैं। एक विशेष बात यह ध्यान रखें कि तीसरे पानी के बाद यूरिया का प्रयोग बंद कर देना चाहिए क्योंकि इसके बाद फसल को नाइट्रोजन की ज्यादा जरूरत नहीं रहती। अपनी फसल की स्थिति देखकर सही खाद का चुनाव करें ताकि आपको बेहतर उत्पादन मिल सके।
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