न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी वनडे सीरीज में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे हैं। उनके बल्ले से अपेक्षित रन न निकल पाने के कारण न सिर्फ टीम मैनेजमेंट बल्कि खुद रोहित पर भी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।इसी बीच दूसरे वनडे के बाद भारतीय टीम के कोच रयान टेन डोशेट का एक बयान सामने आया, जिसने विवाद को जन्म दे दिया और फैंस के साथ-साथ क्रिकेट जगत में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
रयान टेन डोशेट के बयान ने बढ़ाई नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रयान टेन डोशेट से रोहित शर्मा की वनडे फॉर्म को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि रोहित ऐसा खिलाड़ी नहीं हैं जो अपने निजी आंकड़ों के लिए खेलें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विकेट की मुश्किल परिस्थितियां और सीरीज से पहले सीमित क्रिकेट की कमी, इसके पीछे की वजह हो सकती है। हालांकि, यह बयान रोहित के समर्थकों को रास नहीं आया और सोशल मीडिया पर कोच की जमकर आलोचना शुरू हो गई।
नीतीश कुमार रेड्डी को लेकर भी उठे सवाल
रोहित शर्मा के अलावा रयान टेन डोशेट ने युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी के प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की थी। इसे लेकर भी कई पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ असहज नजर आए। आलोचकों का मानना है कि इस तरह के बयान सार्वजनिक मंच पर देने से खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है, खासकर तब जब टीम एक अहम सीरीज खेल रही हो।
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प्रियांक पांचाल ने कोच को सुनाई खरी-खोटी
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले अनुभवी बल्लेबाज प्रियांक पांचाल ने भी रयान टेन डोशेट के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रोहित शर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी को लेकर कोच की टिप्पणियां बिल्कुल अनुचित थीं। पांचाल ने यह तक कह दिया कि विदेशी कोच भारत में अक्सर इसलिए सफल नहीं हो पाते, क्योंकि उन्हें यहां खिलाड़ियों के साथ रिश्तों को संभालने की कला नहीं आती।
‘रिश्तों को समझना भी जरूरी’
प्रियांक पांचाल ने आगे कहा कि भारत जैसे क्रिकेटिंग माहौल में सिर्फ तकनीकी ज्ञान काफी नहीं होता। यहां खिलाड़ियों के आत्मसम्मान, अनुभव और भावनाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि अगर किसी कोच के पास अपने करियर में दिखाने लायक बड़ी उपलब्धियां न हों, तो ऐसे बयान और ज्यादा खटकते हैं।
गौरतलब है कि इस वनडे सीरीज से पहले रोहित शर्मा शानदार लय में नजर आ रहे थे। उन्होंने लगातार रन बनाए थे और तैयारी के लिहाज से विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में भी हिस्सा लिया था। ऐसे में कुछ मैचों में असफलता के आधार पर सवाल खड़े करना कई लोगों को जल्दबाजी भरा फैसला लग रहा है। अब देखना होगा कि इस विवाद का टीम इंडिया के माहौल पर आगे क्या असर पड़ता है।
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