रायगढ़: सत्ताधारी पार्टी के संरक्षण में प्रदेश की सहकारी संस्थाएं दिवालिया हो चुकी हैं। इनका इस्तेमाल केवल फर्जीवाड़े और गबन के लिए ही किया जा रहा है। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हिस्सा हर तरफ बंटता है। बरमकेला अपेक्स बैंक ब्रांच में करीब दस करोड़ गबन में केवल वहीं के कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। अब बैंक मुख्यालय ने ईओडब्ल्यू को प्रकरण सौंपने का निर्णय लिया है ताकि बाकी के आरोपी भी पकड़े जाएं। अपेक्स बैंक बरमकेला में करोड़ों का गबन करने वाले ब्रांच मैनेजर समेत आठ लोगों पर 4 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। लंबे समय से चल रही जांच में 17 समितियों में घोटाला पकड़ा गया।सारंगढ़-बिलाईगढ़ की सहकारी समितियों में व्याप्त भ्रष्टाचार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। किसानों के नाम पर समिति के खाते से करोड़ों रुपए का गबन कर लिया गया।
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बरमकेला ब्रांच में अचानक से करोड़ों का ट्रांजेक्शन सामने आया तो मुख्यालय ने पड़ताल की। गड़बड़ी मिलने पर पूर्व शाखा प्रबंधक अधिकारी डीआर वाघमारे, मीनाक्षी मांझी लेखाधिकारी और लिपिक आशीष पटेल को सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा चार आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। अपने निजी बैंक आईडी का दुरुपयोग करते हुए समिति तथा बैंक के राशि का सुनियोजित तरीके से गबन किया गया। 1 अप्रैल 2024 से 6 नवंबर 2024 तक समिति बड़े नवापारा, बरमकेला, बोंदा, दुलोपाली, लेंध्रा, लोधिया, लुकापारा, साल्हेओना, सरिया, तौसीर, देवगांव, गोबरसिंघा, कालाखूंटा, कंठीपाली, करनपाली, कुम्हारी एवं पंचधार के केसीसी खातों को नामे कर कुल 887 किसानों के डीएमआर कैश, काइंड खातों को निरंक किया गया है।
9,91,20,877 रुपए को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर नकद आहरण किया गया। अपेक्स बैंक हर समिति के लिए लोन लिमिट तय करता है। इसी में से किसानों को खाद-बीज लोन दिया जाता है। यह लोन लिंकिंग से वसूलकर बैंक को वापस करना होता है। बरमकेला ब्रांच में किसानों को बताए बिना उनके नाम पर लोन चढ़ा दिया गया और आहरण कर लिया गया। इस मामले में वर्तमान ब्रांच मैनेजर अरविंद शुक्ला की शिकायत पर बरमकेला थाने में पूर्व शाखा प्रबंधक अधिकारी डीआर वाघमारे, मीनाक्षी मांझी लेखाधिकारी और लिपिक आशीष पटेल, आउटसोर्सिंग स्टाफ कम्प्यूटर ऑपरेटर रमाकांत श्रीवास, कम्प्यूटर ऑपरेटर लिकेश बैरागी, गार्ड अरुण चंद्राकर, खीरदास महंत और बालकृष्ण कर्ष के विरुद्ध बीएनएस की धारा 3 (5), 316 (5), 318 (4), 336 (3), 338 और 340 (2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई, लेकिन राशि का बंटवारा कई दूसरे खातों में भी किया गया है। इसलिए बैंक मुख्यालय ने अब मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा है।
कई लोगों को बांटी रकम
प्रारंभिक जांच में गबन प्रमाणित हो गया था। कुल गबन राशि की गणना के लिए विस्तृत जांच करवाया गया। 8 नवंबर 2024 को शाखा प्रबंधक डीआर वाघमारे, लेखा अधिकारी मीनाक्षी मांझी तथा लिपिक आशीष पटेल को निलंबित किया गया था। इन तीनों ने अपने निजी बैंक आईडी/पासवर्ड का दुरुपयोग करते सुनियोजित तरीके से गबन किया। बाघमारे और मीनाक्षी की गैरहाजिरी में भी उनकी आईडी से रुपए निकाले जाते रहे। प्रतिदिन नकद आहरण की जानकारी भी छिपाई गई। मिली जानकारी के मुताबिक घोटाले की जानकारी रायगढ़ नोडल कार्यालय को हो गई थी। कुछ कर्मचारियों ने ब्रांच मैनेजर और कर्मचारियों को ब्लैकमेल किया और खुद भी हिस्सा मांगा। इसके अलावा समिति प्रबंधकों ने भी इस रकम में हिस्सा लिया। इसलिए ईओडब्ल्यू को प्रकरण भेजा गया है।
फिर से विशेष जांच दल गठित
इतने बड़े गबन के मामले में अपेक्स बैंक मुख्यालय रायपुर में बैठे मठाधीशों का सिंहासन भी डोल गया। खुद को बचाने के लिए पहले उन्होंने मामला दबाने का प्रयास किया। लेकिन गबन की रकम इतनी अधिक थी कि कोई संभाल नहीं पाया। अब फिर से एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। इस टीम में मंजू महेन्द्र पांडे उप आयुक्त सहकारिता, व्यासनारायण साहू एआरसीएस सहकारिता रायगढ़ तथा मेसर्स पीयूष पी. जैन एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म, भिलाई को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। अब गबन की राशि की वसूली करने की चुनौती बैंक के सामने है।
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