चाणक्य को भारत के कौटिल्य के रूप में भी जाना जाता है। उनकी चाणक्य नीति (chanakya niti आज के समय में भी काफी लोकप्रिय है, जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। चाणक्य नीति में यह भी बताया गया है कि आप अपने सच्चे दोस्त की पहचान कैसे कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।
कौन है सच्चा दोस्त
1. आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसण्कटे।
राजद्वारे श्मशाने च यात्तिष्ठति स बान्धवः ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब कोई बीमार होने पर, असमय शत्रु से घिर जाने पर, राजकार्य में सहायक रूप में तथा मृत्यु पर श्मशान भूमि में ले जाने वाला व्यक्ति ही सच्चा मित्र और बन्धु है। यानी जो आपका हर परिस्थिति में साथ दे, वही आपका सच्चा दोस्त है।
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ऐसे मित्र को छोड़ देने में है भलाई
2. परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ॥
इस श्लोक का भावार्थ है कि पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाला और सामने से प्रिय बोलने वाला मित्र, ठीक उसी प्रकार है जैसे विष से भरा हुआ एक घड़ा, जिसके मुंह पर दूध रखा होता है। ऐसे दोस्त का त्याग कर देने में ही भलाई है, वरना आगे चलकर आपको काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ऐसे दोस्त पर न करें विश्वास
3. न विश्वसेत्कुमित्रे च मित्रे चापि न विश्वसेत्।
कदाचित्कुपितं मित्रं सर्वं गुह्यं प्रकाशयेत् ॥
आचार्य चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि एक कुमित्र पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए। भले ही आपका कोई कितना भी खास क्यों न हो, फिर भी मित्र पर भी अधिक विश्वास करके उसे अपनी गुप्त बातें नहीं बतानी चाहिए। क्योंकि अगर कभी दोस्ती खराब हो जाए, तो वह आपकी गुप्त बातें सभी को बता सकता है।
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