परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : छत्तीसगढ़ शासन की मछली पालन योजनाओं से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार और आय का नया अवसर,ग्रामीण परिवेश में मछली पालन एक लोकप्रिय एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है। कम समय और अपेक्षाकृत कम लागत में अच्छी आमदनी होने के कारण मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बन रहा है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के मछली पालन विभाग द्वारा राज्य एवं केंद्र पोषित विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर ग्रामीण, मछुआरे एवं मत्स्य कृषक आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में छुरा क्षेत्र के केरगांव में स्थित कृषि ऋषि आश्रम में एग्रोकेट्स सोसायटी फॉर रूलर डेवलपमेंट के द्वारा ग्रामीण महिला एवं पुरूषों को विभागीय मछुआ प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें राज्य पोषित योजनाएं-मछली पालन विभाग द्वारा मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण, उपकरण एवं अनुदान सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अंतर्गत 10 दिवसीय शिक्षण-प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन हेतु प्रशिक्षण, प्रगतिशील मत्स्य कृषकों का अध्ययन भ्रमण, पंजीकृत सहकारी समितियों को अनुदान, नाव-जाल एवं मत्स्याखेट जाल का निःशुल्क वितरण, फुटकर मछली विक्रय हेतु आइस बॉक्स व उपकरण सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।
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इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं जनजाति हितग्राहियों के लिए मौसमी तालाबों में मत्स्य संवर्धन, झींगा सह मछली पालन जैसी विशेष योजनाओं का भी प्रावधान किया गया है।प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन को प्रोत्साहित कर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना में मीठे जल की फिन फिश हैचरी, नवीन तालाब निर्माण, मत्स्य बीज संवर्धन, मत्स्य आहार एवं इनपुट सहायता, सजावटी मछली पालन इकाइयों की स्थापना, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लॉक कल्चर सिस्टम, जलाशयों में केज कल्चर, शीत गृह, प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स सहित मोटरसाइकिल व ई-रिक्शा, सजीव मछली विक्रय केंद्र तथा मत्स्य आहार संयंत्रों की स्थापना हेतु लाखों रुपये के अनुदान का प्रावधान है।
इन योजनाओं में सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग अनुदान राशि निर्धारित की गई है, जिससे अधिक से अधिक हितग्राही लाभान्वित हो सकें।सामाजिक सुरक्षा योजनाएं पारंपरिक मछुआरों के लिए नाव-जाल वितरण, बचत सह राहत योजना तथा मत्स्य जीवियों का समूह बीमा भी लागू है। समूह बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में पांच लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान किया जाता है, जिससे मछुआरा परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिल सके। वहीं संपर्क की अपील करते हुए मछली पालन विभाग ने जिले के इच्छुक मछुआरों, मत्स्य कृषकों एवं युवाओं से अपील की है कि वे इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपने नजदीकी मछली पालन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी अथवा जिला कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं, वहीं इस अवसर पर मत्स्य विभाग से सहायक मत्स्य अधिकारी महेंद्र टांडेकर, ऐश्वर्या साहू मत्स्य निरीक्षक, एग्रोकेट से विजय कुमार आजीविका विशेषज्ञ ,हरीश नेताम, चंद्रपाल, ईश्वर नेताम, दिलिप ठाकुर सरपंच प्रतिनिधि देवरी, किसान आत्मा ठाकुर एवं क्षेत्र के महिला एवं पुरूषों ने बड़ी संख्या में भाग लिये।
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