रविशंकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के हक में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

रविशंकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के हक में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

बिलासपुर :  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों के लिए न्याय की एक बड़ी जीत हुई है। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य सरकार ने प्रोफेसरों को सातवें वेतनमान के आधार पर पेंशन देने की मंजूरी दे दी है।इस मामले में उच्च शिक्षा सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका को समाप्त कर दिया है।

हाई कोर्ट में सचिव की पेशी और सरकार का फैसला

पेंशन विवाद के इस मामले में मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत के पिछले आदेश के अनुपालन में उच्च शिक्षा सचिव एस. भारतीदासन व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की पीठ को सूचित किया कि विभाग ने सभी सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को सातवें वेतनमान के अनुरूप पेंशन देने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त विभाग ने भी इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।

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क्या था पूरा विवाद?

यह मामला रविशंकर विश्वविद्यालय के लगभग 20 सेवानिवृत्त प्रोफेसरों से जुड़ा है। इन प्रोफेसरों को उनके सेवाकाल के दौरान सातवें वेतनमान का लाभ मिल रहा था, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद प्रशासन ने उनकी पेंशन का निर्धारण पुराने यानी छठवें वेतनमान के आधार पर कर दिया था। इस विसंगति के कारण प्रोफेसरों को आर्थिक नुकसान हो रहा था, जिससे असंतुष्ट होकर उन्होंने अधिवक्ता मनीष उपाध्याय के माध्यम से हाई कोर्ट की शरण ली थी।

कोर्ट का सख्त आदेश और अवमानना याचिका

प्रारंभिक सुनवाई के बाद, जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने प्रोफेसरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को 120 दिनों के भीतर सातवें वेतनमान के अनुसार पेंशन पुनरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। जब तय समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं हुआ, तो प्रोफेसरों ने कोर्ट की अवहेलना को लेकर अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए सचिव को तलब किया था, जिसके बाद सरकार ने अपनी गलती सुधारते हुए भुगतान की सहमति दी।

अवमानना याचिका निराकृत, जल्द मिलेगी राशि

उच्च शिक्षा सचिव द्वारा दी गई जानकारी और वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद हाई कोर्ट ने संतोष व्यक्त किया। अदालत ने अब संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र प्रोफेसरों को उनकी पेंशन की बकाया और संशोधित राशि शीघ्र जारी की जाए। इस आश्वासन और प्रक्रिया पूर्ण होने की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने अवमानना याचिका को डिस्पोज ऑफ (निराकृत) कर दिया है।










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