रायपुर में लागू हुई कमिश्नरी प्रणाली,जाने क्या-कुछ बदलेगा?

रायपुर में लागू हुई कमिश्नरी प्रणाली,जाने क्या-कुछ बदलेगा?

रायपुर  : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अब कमिश्नरी प्रणाली लागू कर दी गई है। गृह पुलिस विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए रायपुर के 21 पुलिस थानों को कमिश्नरी प्रणाली में शामिल करने का आदेश दिया है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की ओर से जारी की गई अधिसूचना में 21 पुलिस थानों के नाम दर्ज हैं, जहां कमिश्नरी प्रणाली लागू होगी।

शहर और गांव में होगा अलग प्रशासन

रायपुर शहरी कमिश्नरी सिस्टम में सिविल लाइन, देवेंद्रनगर, तेलीबांधा, कोतवाली, गंज, मौदहापारा, गोलबाजार, पुरानी बस्ती, डीडीनगर, आमानाका, आजादचौक, सरस्वतीनगर, टिकरापारा, कबीरनगर, राजेंद्रनगर, मुजगहन (सेजबहार), उरला, खमतराई, गुढ़ियारी, पंडरी और खम्हारीड पुलिस थाने का नाम शामिल है।

गृह विभाग ने ग्रामीण रायपुर में अलग एसपी की तैनाती की है। धरसींवा, खरोरा, तिल्दा नेवरा, माना, मंदिर हसौद, आरंग, नवा रायपुर, राखी, अभनपुर, गोबरा नवापारा और उरला पुलिस थाने रायपुर ग्रामीण के अंतर्गत आएंगे।

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कमिश्नरी प्रणाली के अधिकार

आमतौर पर पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं। वो आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश अनुसार ही कार्य करते हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर जिला अधिकारी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के ये अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिल जाते हैं।

कैसे काम करता है कमिश्नरी सिस्टम?

पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने पर कमिश्नर का मुख्यालय बनाया जाता है। एडीजी स्तर के सीनियर IPS अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाकर तैनात किया जाता है। इस दौरान महानगर को कई जोन में विभाजित किया जाता है। हर जोन में DCP की तैनाती होती है, जो SSP की तरह उस जोन में काम करता है, वो उस पूरे जोन के लिए जिम्मेदार होता है। सीओ की तरह थानों में SP तैनात होते हैं, जिनके अधिकार क्षेत्र में 2-4 थाने आते हैं।

कब से लागू हुई कमिश्नरी प्रणाली?

आजादी से पहले कमिश्नरी प्रणाली अंग्रेजों के शासनकाल से ही चली आ रही है। आजादी के बाद ये भारतीय पुलिस का हिस्सा बन गई। भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के भाग 4 के तहत जिला अधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण करने के कुछ अधिकार होते हैं। इसके अलावा, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुछ शक्तियां मिलती हैं। कमिश्नर प्रणाली में ये सभी अधिकार पुलिस को मिल जाते हैं।










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