वजीरू स्वामी के अनुसार वास्तु में कैक्टस, बोनसाई, इमली, मेहंदी और कपास के पौधे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव बढ़ता है. आपको बता दें कि सही दिशा और सही पौधे का चुनाव जहां जीवन में खुशहाली लाता है वहीं कुछ पौधों का घर के आंगन या अंदर होना विनाशकारी भी साबित हो सकता है.
भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों को सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है. सही दिशा और सही पौधे का चुनाव जहां जीवन में खुशहाली लाता है वहीं कुछ पौधों का घर के आंगन या अंदर होना विनाशकारी भी साबित हो सकता है. वजीरू स्वामी ने बताया वास्तु नियमों के अनुसार गलत पौधों के चयन से न केवल आर्थिक तंगी आती है बल्कि परिवार में कलह और मानसिक तनाव भी बढ़ता है.
कांटेदार पौधे : घर के मुख्य द्वार या अंदर कभी भी कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे नहीं लगाने चाहिए। वास्तु के अनुसार ये पौधे रिश्तों में चुभन पैदा करते हैं. इनसे निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े बढ़ाती है और धन के आगमन में बाधा डालती है.
बोनसाई : दिखने में आकर्षक लगने वाले बोनसाई पौधे प्रगति में बाधक माने जाते हैं. चूंकि इन पौधों की वृद्धि को कृत्रिम रूप से रोका जाता है इसलिए मान्यता है कि इन्हें घर में रखने से सदस्यों की उन्नति और करियर की ग्रोथ भी रुक जाती है.
इमली का पेड़ : धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार इमली के पेड़ पर नकारात्मक शक्तियों का वास होता है. इसे घर के पास या आंगन में लगाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं और घर के वातावरण में हमेशा एक अनजाना डर या भारीपन महसूस होता है.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
मेहंदी का पौधा:मेहंदी का उपयोग शुभ कार्यों में जरूर होता है लेकिन इसका पौधा घर में लगाना वर्जित है. माना जाता है कि इसकी तीव्र गंध नकारात्मक ऊर्जाओं को आकर्षित करती है जिससे घर की शांति भंग होती है और व्यक्ति मानसिक रूप से अशांत रहने लगता है.
कपास का पौधा: सफेद कपास या रेशमी कपास का पौधा देखने में भले ही सुंदर लगे लेकिन वास्तु में इसे दरिद्रता का प्रतीक माना गया है. यह पौधा घर में धूल और सूनापन लाता है, जिससे संचित धन धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है और आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है.
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments