2020 में ट्रंप के प्लान का किया था विरोध,अब गाजा प्लान में शामिल होने पर घिरे शहबाज शरीफ

2020 में ट्रंप के प्लान का किया था विरोध,अब गाजा प्लान में शामिल होने पर घिरे शहबाज शरीफ

नई दिल्ली :  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 22 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में गाजा में शांति के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस को लॉन्च किया। हालांकि 2025 में इसे मूल रूप से गाजा पट्टी में सीजफायर और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए एक मैकेनिज्म के तौर पर प्रस्तावित किया गया था, लेकिन अब इसे ग्लोबल संघर्षों को भी सुलझाने के लिए बढ़ाया जाना है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावोस में दुनिया के दूसरे नेताओं के साथ ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस चार्टर पर साइन किए और इसे स्थायी संघर्ष विराम का समर्थन करने और फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता बढ़ाने के तरीके के तौर पर देखा।

2020 में ट्रंप के प्लान का किया था विरोध

हालांकि, 2020 में मिडिल ईस्ट के लिए ट्रंप के "पीस टू प्रॉस्पेरिटी" प्लान का शरीफ ने कड़ा विरोध किया था। उस समय वह पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता थे। पाकिस्तानी नेता ने इस शांति योजना को अन्यायपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और दमनकारी बताते हुए कहा था कि फिलिस्तीनियों ने इसे फाड़कर सही किया।

29 जनवरी, 2020 को शरीफ ने एक्स पर लिखा, "राष्ट्रपति ट्रंप का मिडिल ईस्ट शांति प्लान असल में यरूशलेम पर इजरायल के कब्जे और फिलिस्तीनियों की जमीन पर अवैध बस्तियों को वैधता देता है।" वहीं, अब पाकिस्तान के "बोर्ड ऑफ पीस" में शामिल होने के फैसले से देश में जबरदस्त घरेलू विरोध शुरू हो गया है।

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पीस बोर्ड में शामिल होने पर शरीफ की आलोचना 

जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने कहा, "हम 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं।"

पार्टी ने एक बयान में कहा कि वह इस बात पर जोर देती है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के फैसले हमेशा पूरी पारदर्शिता और सभी प्रमुख राजनीतिक स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर सलाह-मशविरा करके लिए जाने चाहिए। विपक्षी पार्टी ने कहा है, "पीटीआई पाकिस्तान सरकार से अपील करती है कि जब तक पूरी सलाह-मशविरे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक 'बोर्ड ऑफ पीस' में किसी भी औपचारिक भागीदारी को वापस ले लिया जाए।"

पाकिस्तानी पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने सवाल उठाया कि क्या देश सिर्फ ट्रंप की गुड बुक्स में रहना चाहता है। उन्होंने बताया कि यह पाकिस्तान के लिए सबसे विनाशकारी बात साबित होगी।

लेखिका और एक्टिविस्ट फातिमा भुट्टो ने कहा, "तो पाकिस्तान इस शांति बोर्ड पर इजरायल के साथ बैठेगा - वही लोग जिन्होंने फिलिस्तीनी नरसंहार किया? कितनी शर्म की बात है।"










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