अगर आप पहाड़ों की सादगी, वहां का खाना और देसी स्वाद पसंद करते हैं, तो चमकीना आपके दिल के बहुत करीब लगेगा. इसे लोग प्यार से पहाड़ी चाउमीन भी कहते हैं. यह डिश कोई नई नहीं है, बल्कि सदियों से पहाड़ों में बनाई और खाई जा रही है. आज भी गांवों में जब कुछ जल्दी, सादा और सेहतमंद बनाना होता है, तो चमकीना सबसे पहले याद आता है.
चमकीना बनाने के लिए सामग्री
पहाड़ों में चमकीना सिर्फ एक खाना नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है. इसे बनाने में ज्यादा मसाले नहीं लगते और न ही कोई खास तैयारी चाहिए. सबसे पहले 1 कप गेहूं के आटे को आवश्यकतानुसार पानी डालकर अच्छे से गूंथ लिया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे रोटी के लिए गूंथा जाता है.
इसके बाद आटे से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा लेकर हथेलियों के बीच हल्के हाथों से लंबा किया जाता है. यह बिल्कुल नूडल्स जैसी शक्ल ले लेता है, इसलिए लोग इसे पहाड़ी चाउमीन भी कहते हैं.
उबालने की प्रक्रिया
अब एक बर्तन में पानी उबलने रख दिया जाता है. उबलते पानी में ½ चम्मच नमक और 1 चम्मच तेल डालते हैं. जैसे ही आटे की लंबी आकृति बनती है, उसे सीधे उबलते पानी में डाल दिया जाता है ताकि वह आपस में चिपके नहीं. कुछ मिनटों बाद जब चमकीना अच्छे से पक जाता है, तो हाथ से दबाकर चेक कर लिया जाता है कि वह नरम हुआ या नहीं. फिर इसे ठंडे पानी से धो लेना चाहिए.
चाउमीन में तड़के का तरीका
अब आती है इसके स्वाद की असली जान, यानी तड़का. कड़ाही में 1 चम्मच तेल गरम करके जीरा डालें. फिर 1 मध्यम आकार का बारीक कटा प्याज़, 1 बारीक कटा टमाटर, 4–5 लहसुन की कलियां और 1–2 हरी मिर्च डालें. जब इनकी खुशबू आने लगे, तो ¼ चम्मच हल्दी, स्वादानुसार ¼ चम्मच लाल मिर्च, 1 चम्मच धनिया पाउडर और ¼ चम्मच जीरा पाउडर डालें.
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ज्यादा मसालों की जरूरत नहीं होती, क्योंकि चमकीना की सादगी ही इसकी पहचान है. अब इसमें उबला हुआ चमकीना डालकर दो मिनट तक अच्छे से मिलाएं ताकि तड़के का स्वाद इसमें पूरी तरह समा जाए.
गार्निश और परोसने का तरीका
आखिर में ऊपर से 2 चम्मच ताजा कटा हरा धनिया डालकर इसे गार्निश कर दें. गरम-गरम चमकीना जब थाली में परोसा जाता है, तो उसका स्वाद और खुशबू दोनों ही मन मोह लेते हैं. यह डिश स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है, क्योंकि इसमें गेहूं के आटे का इस्तेमाल होता है.यही वजह है कि सदियों बाद भी चमकीना आज भी पहाड़ों की रसोई में उतना ही पसंद किया जाता है. यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, सादगी और परंपरा का स्वाद है.
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