सम्मान के रूप में किसी व्यक्ति को पुष्प देना भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा रहा है. समय के साथ-साथ इसमें भी परिवर्तन हुए और आज प्रोफेशनल तरीके से किसी को वेलकम करने के लिए और उसे सम्मान देने के लिए बुके का इस्तेमाल किया जाता है. जिसमें कुछ गुलाब के फूल और अन्य फूल लगे होते हैं. उसी में एक ग्लाइडोलियस का भी टहनियां लगी होती है. दरअसल, इसका बताने का उद्देश्य यह है कि यही ग्लाइडोलियस की खेती उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में की जाती है जिसे धर्मेंद्र नाम के किसान द्वारा अच्छे क्षेत्रफल में इसे तैयार किया जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं धर्मेंद्र इसको किस तरह से करते हैं और कितनी कमाई हो रही है.
इस तरह की शुरुआत
सुल्तानपुर के प्रतापपुर के रहनेवाले किसान धर्मेंद्र कुमार तिवारी बताते हैं कि वह पहले पारंपरिक खेती में धान और गेहूं की ही फसल तैयार करते थे लेकिन जब उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क साधा और बाजार के हाव-भाव को समझा तो उन्हें भी लगा कि पारंपरिक खेती से कुछ अलग करना चाहिए और तभी उन्होंने उद्यान विभाग में संपर्क किया और जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्लाइडोलियस फूल की शुरुआत की और इससे हुए वैज्ञानिक तरीके से कर रहे हैं.
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किसान धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि उन्हें उद्यान विभाग द्वारा 10000 ग्लाइडोलियस फूल का कंद मिला है. जिसको उन्होंने लगभग एक बीघा एरिया में लगाया हुआ है उनके मुताबिक एक कांड में पांच फूल तैयार होंगे यानी कि सभी तैयार हो जाते हैं, तो 50,000 फूल तैयार होंगे और एक फूल की कीमत लगभग ₹5 आती है जिससे वह मात्र 7 महीने की इस खेती में लाखों रुपए की कमाई करते हैं.
इस तरह करते हैं खेती
ग्लैडियोलस फूल की सफल खेती के लिए सबसे पहले खेत की सही तैयारी करना बेहद आवश्यक होता है. इसकी शुरुआत मिट्टी सुधार (Soil Treatment) से की जाती है. इसके लिए खेत में अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर की खाद या जैविक खाद डालकर जुताई की जाती है, ताकि मिट्टी उपजाऊ और भुरभुरी हो सके.
इसके बाद खेत में जल निकासी को ध्यान में रखते हुए ऊँची और चौड़ी मेड़ें (Raised Beds) बनाई जाती हैं. ये मेड़ें पौधों को अधिक नमी से बचाती हैं और जड़ों के विकास में मदद करती हैं. तैयार की गई मेड़ों पर ग्लैडियोलस के स्वस्थ कंद (Bulbs/Corms) को उचित दूरी पर रोपित किया जाता है.इस तरह खेत की अच्छी तैयारी और सही विधि से कंद रोपण करने पर ग्लैडियोलस फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं.
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