घर नहीं हटेंगे, लड़ाई बढ़ेगी: लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन तेज

घर नहीं हटेंगे, लड़ाई बढ़ेगी: लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन तेज

बिलासपुर : लिंगियाडीह क्षेत्र में लगातार हो रही तोड़फोड़ की कार्रवाई और बेदखली की आशंका ने एक बार फिर प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 50 वर्षों से बसे सैकड़ों परिवारों को उजाड़ने की तैयारी के आरोपों के बीच सर्वदलीय लिंगियाडीह बचाव संगठन, बेलतरा विधानसभा क्षेत्र लोकसभा बिलासपुर के बैनर तले नागरिकों ने प्रशासन के समक्ष 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए स्थायी समाधान की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ते आक्रोश ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब मामला सिर्फ नोटिस और सर्वे तक सीमित नहीं रहने वाला।

संगठन का कहना है कि लिंगियाडीह मास्टर प्लान के अनुसार आबादी क्षेत्र है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा बार-बार अलग-अलग परियोजनाओं का हवाला देकर लोगों को डराया जा रहा है। बीते महीनों में कभी सड़क चौड़ीकरण, कभी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तो कभी गार्डन के नाम पर तोड़फोड़ की चेतावनी ने पूरे इलाके को अनिश्चितता और भय के माहौल में धकेल दिया है।

मांग पत्र में 19 मार्च 2025 की उस कार्रवाई को याद दिलाया गया, जब सैकड़ों मकान और दुकानों को तोड़ दिया गया था। संगठन का आरोप है कि आज तक न तो पीड़ितों का समुचित पुनर्वास हुआ और न ही किसी प्रकार की राहत दी गई। प्रभावित परिवार आज भी आर्थिक बदहाली, सामाजिक असुरक्षा और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

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कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बताते हुए कहा कि लिंगियाडीह में बसे लोग अवैध नहीं, बल्कि व्यवस्था के भरोसे जी रहे नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में शासन द्वारा आबादी घोषित कर पट्टा वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी और लोगों ने ₹10 प्रति वर्गफुट की प्रीमियम राशि भी जमा की, इसके बावजूद आज तक स्थायी पट्टा नहीं दिया गया। यह सीधा-सीधा जनता के साथ धोखा है।

दिलीप पाटिल ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री आवास योजना का ढोल पीटा जा रहा है, दूसरी तरफ उन्हीं गरीबों के घर तोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि यदि लिंगियाडीह के लोगों को उनका हक नहीं मिला और तोड़फोड़ जारी रही, तो यह आंदोलन सिर्फ लिंगियाडीह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बिलासपुर में जनआंदोलन का रूप लेगा।

नगर निगम के महापौर, कमिश्नर और जोन कमिश्नर द्वारा अखबार में दिए गए उस बयान पर भी तीखी आपत्ति जताई गई, जिसमें लिंगियाडीह में मकान तोड़कर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाने की बात कही गई थी। संगठन ने इसे गरीबों को उजाड़ने की खुली घोषणा बताते हुए इस बयान को सार्वजनिक रूप से वापस लेने की मांग की है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निगम कर्मचारी रोज इलाके में आकर नाली के बाद 20 फीट और मकान तोड़े जाने की बात कहकर दहशत फैलाते हैं। इस वजह से पूरा मोहल्ला तनाव और डर के साये में जी रहा है। साथ ही 30 वर्षों से शाम के समय सब्जी बेचकर जीवन यापन करने वाले गरीब विक्रेताओं को परेशान किए जाने और सब्जी जब्त करने पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

मांग पत्र में चिंगराजपारा, चांटीडीह, मोपका, खमतराई और बहतराई जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और सभी निर्णय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों की सहमति से लेने की मांग की गई है। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की 9 फरवरी 2025 की उस घोषणा का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कच्चे मकानों में रहने वालों को वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिया जाएगा और किसी का घर नहीं तोड़ा जाएगा।

सर्वदलीय लिंगियाडीह बचाव संगठन और कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।










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