सरसों की फसल इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है, लेकिन बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. सरसों की फसल पर एफिड्स और पेंटेड बग जैसे हानिकारक कीटों का बड़े पैमाने पर हमला देखा जा रहा है. ये कीट न केवल पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर बना देते हैं, बल्कि पैदावार में भी 30 से 70 प्रतिशत तक की कमी ला सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इनकी रोकथाम नहीं की गई, तो किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान बताते हैं कि सरसों में एफिड्स का प्रकोप आमतौर पर तब बढ़ता है जब बादल छाए रहते हैं और हवा में नमी अधिक होती है.
ये छोटे कीट पत्तियों, टहनियों और फूलों के गुच्छों पर चिपके रहते हैं और उनका रस चूस लेते हैं, जिससे फलियां पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती हैं. ऐसे में किसान अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें. यदि उन्हें पौधों के ऊपरी हिस्सों पर चिपचिपा पदार्थ या काले-हरे रंग के कीट दिखाई दें, तो तुरंत उपचार कर दें. शुरुआती अवस्था में प्रभावित टहनियों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले.
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कैसे करें उपचार
सरसों की फसल को एफिड्स और अन्य कीटों से बचाने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाना सबसे प्रभावी है. रासायनिक नियंत्रण के लिए किसान इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) 0.3 ml मात्रा या थायोमेथोक्सम (Thiamethoxam) 0.2ml को प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. जैविक जैविक उपचार करने के लिए 5% नीम के तेल (Neem Oil) का घोल का छिड़काव कर सकते हैं. छिड़काव हमेशा दोपहर के बाद करना चाहिए ताकि मित्र कीट जैसे मधुमक्खियों को नुकसान न पहुंचे.
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