नई दिल्ली : सिंघम, दबंग 2 और वांटेड जैसी हिंदी फिल्मों में प्रमुख भूमिका निभा चुके दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज (Prakash Raj) ने बॉलीवुड को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। एआर रहमान के विवादित कमेंट के बाद प्रकाश राज का ऐसा बयान फिर से मीडिया की सुर्खियों में है।
कहीं मिस हो रही सार्थक कहानी
इसी के साथ ही इसने बॉलीवुड के कल्चर को लेकर कई सारे सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं। एक्टर कहा कहना है कि मुख्यधारा का बॉलीवुड अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है। केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के नौवें संस्करण में बोलते हुए, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ने हिंदी सिनेमा की खुलकर आलोचना करते हुए इसे आर्टिफिशियल और सार्थक कहानी कहने की बजाय पैसे से प्रेरित बताया। प्रकाश राज उन अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी सिनेमा में काम किया है। हालांकि प्रकाश राज मानते हैं कि तमिल और मलयालम इंडस्ट्री हिंदी सिनेमा से बेहतर है।
सब प्लास्टिक जैसा लगता है - प्रकाश
कोझिकोड में शनिवार को केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान बोलते हुए प्रकाश राज ने कहा- 'आज के समय में मुझे लगता है कि मलयालम और तमिल सिनेमा बहुत मजबूत फिल्में बना रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदी सिनेमा ने अपनी जड़ें खो दी हैं. सब कुछ बहुत सुंदर और चमकदार दिखता है, लेकिन प्लास्टिक जैसा लगता है, जैसे मैडम तुसाद म्यूजियम मोम की मूर्तियां। हमारे यहां दक्षिण में अब भी कहानियां हैं। तमिल के नए युवा निर्देशक दलित मुद्दों पर फिल्में बना रहे हैं, और यह बहुत उम्मीद देता है।'
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हिंदी सिनेमा कटता जा रहा है
उन्होंने आगे कहा- 'मल्टीप्लेक्स आने के बाद मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ मल्टीप्लेक्स के लिए फिल्में बनाने लगी है। प्रकाश के अनुसार, इस बदलाव ने फिल्म निर्माताओं को उस ओर धकेल दिया जिसे उन्होंने पेज 3 कल्चर कहा, जिससे धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा देश के बड़े हिस्से से कटता चला गया। उन्होंने कहा ग्रामीण राजस्थान और बिहार से संपर्क खो बैठा है। आज का फोकस रील्स, पेज 3 कवरेज और सेल्फ प्रमोशन पर ज्यादा है। इन सबकी वजह से इंडस्ट्री से जुड़ाव टूट गया है।'
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