कोलकाता : बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहण पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोकभवन(राज्यपाल के आवास) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि वह जल्द ही दिल्ली का दौरा करेंगी। तृणमूल कांग्रेस की रणनीति इस बार न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और चुनाव आयोग को घेरने की है।
दिल्ली जाने की पुष्टि
बताते चलें कि गत चार नवंबर को कोलकाता में एक विशाल रैली के दौरान ममता बनर्जी के भतीजे वह तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव सांसद अभिषेक बनर्जी ने हुंकार भरी थी कि यदि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाया गया, तो वह एक लाख समर्थकों के साथ दिल्ली कूच करेंगे। अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कमान संभालते हुए दिल्ली जाने की पुष्टि कर दी है।
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता का यह दौरा बजट सत्र के दौरान हो सकता है, ताकि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल सकें। तृणमूल नेतृत्व का दावा है कि उन्होंने बंगाल में चुनाव आयोग की कथित 'धांधली' को रंगे हाथों पकड़ा है।
वोटिंग मशीनरी की गड़बड़ी नहीं पकड़ पाए
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल का मानना है कि बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विपक्षी दल वोटिंग मशीनरी की गड़बड़ी नहीं पकड़ पाए, लेकिन बंगाल में तृणमूल ने बूथ स्तर पर इसे उजागर किया है। ममता बनर्जी दिल्ली जाकर राष्ट्रीय मंच पर यह संदेश देना चाहती हैं कि किस तरह 'एसआईआर' के नाम पर आम जनता को परेशान किया जा रहा है और वैध नागरिकों के नाम काटे जा रहे हैं।
तृणमूल नेताओं का तर्क है कि इस आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी की स्वीकार्यता बढ़ेगी और वह विपक्षी गठबंधन (आईएनडीआईए) के भीतर एक मजबूत चेहरा बनकर उभरेंगी। फिलहाल दिल्ली दौरे की अंतिम तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री के इस रुख ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है।
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