असंतुलित खानपान, तनाव और आयोडीन की कमी इस बीमारी के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। दरअसल, थायरॉइड ग्रंथि शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक हार्मोन का उत्सर्जन करती है। जब यह सक्रिय रूप से कार्य नहीं करती है तो लोग शारीरिक और मानसिक रूप से भी अस्वस्थ महसूस करने लगते हैं।
कम उम्र की महिलाओं में भी आजकल यह समस्या देखने को मिल रही है। इसके पीछे क्या कारण हैं, इसके लक्षण कैसे होते हैं और इससे बचने के लिए किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। आइए इन सभी बातों के बारे में डॉ. राजेश खड़गावत (एंडोक्राइनोलोजिस्ट, एम्स, नई दिल्ली) से जानते हैं।
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कम उम्र की महिलाओं में थायरॉइड के प्रमुख कारण
कम उम्र की महिलाओं में थायरॉइड की बीमारी होने के पीछे कई कारण हैं, जैसे- वायरल संक्रमण, तनाव, आयोडीन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी, शारीरिक गतिविधियां कम करना आदि शामिल हैं। व्यस्त दिनचर्या की वजह से महिलाएं जंक और पैकेज्ड फूड ज्यादा खाने लगी हैं, जिससे उनकी थायरॉइड ग्रंथ प्रभावित हो रही है।
थायरॉइड के लक्षण कैसे होते हैं?
अगर मासिक धर्म में अनियमितता, वजन बढ़ना, कमजोरी, बालों का झड़ना, त्वचा में रूखापन, गले की आवाज का भारी होना, चिड़चिड़ापन या फिर बैड कोलेस्ट्राल बढ़ने जैसे लक्षण हैं तो डाक्टर से संपर्क करके थायरॉइड की जांच करवा लेनी चाहिए। यह एक सामान्य रक्त जांच है जिससे बीमारी का पता चल जाता है।
क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
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