सोनहत में गूँजी हुंकार: समस्याओं के समाधान के लिए कोरिया जन सहयोग समिति ने खोला मोर्चा

सोनहत में गूँजी हुंकार: समस्याओं के समाधान के लिए कोरिया जन सहयोग समिति ने खोला मोर्चा

कोरिया :  क्षेत्र की बदहाल व्यवस्था और लंबे समय से लंबित जनहित की मांगों को लेकर 'कोरिया जन सहयोग समिति' ने हुंकार भर दी है। बुधवार को समिति के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन एसडीएम (SDM) को सौंपा। "हुंकार" नामक इस महा-अभियान के जरिए समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि अब क्षेत्र की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अंधेरे और डिजिटल दूरी के खिलाफ जंग
समिति ने मांग की है कि नावटोला, कचोहर और चंदहा जैसे गांवों में वर्षों से रुके विद्युतीकरण कार्य को तत्काल पूरा किया जाए। साथ ही, आधुनिक युग में भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे रामगढ़ और मेण्ड्रा क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाकर 'डिजिटल क्रांति' लाने की बात कही गई है। सोनहत ,सलगवां और कैलाशपुर कुशमाहा जैसे क्षेत्रों में खराब पड़ी रोड लाइटों को हटाकर नई लाइटें लगाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। 

सड़कों का जाल और बुनियादी ढांचा
ज्ञापन में क्षेत्र की जीवनरेखा कही जाने वाली सड़कों की मरम्मत और निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है: रामगढ़-कोटाडोल (27 किमी) पक्की सड़क और मेण्ड्रा से अमहर तक नए मार्ग का निर्माण तत्काल शुरू हो।तहसील कार्यालय और नवीन कॉलेज तक जाने वाली जर्जर सड़कों के सुधार की मांग। गिधेर और सेमरिया में टूटे पुलों के नव-निर्माण से ग्रामीणों की राह आसान करने की अपील।

सामाजिक न्याय और मितानिनों का सम्मान
समिति ने पंडो जनजाति के लिए विशेष शिविर लगाकर जाति प्रमाण पत्र बनाने और नक्शे से छूटे लोलकी व उरांव पारा को 'राजस्व ग्राम' घोषित करने की मांग की है। इसके अलावा, क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने वाली मितानिन बहनों एम टी एवं समन्वयकों के लंबित मानदेय भुगतान और सोनहत में बना मितानिन भवन तत्काल हैंड ओवर करने की मांग भी इस अभियान का मुख्य हिस्सा है।

वन अधिकार और जन सुविधा
समिति ने प्रशासन को अवगत कराया है कि वन अधिकार पात्रता सूची में दर्ज हितग्राहियों के घरों को 'अतिक्रमण' बताकर न गिराया जाए, बल्कि उन्हें तत्काल पट्टा दिया जाए। राशन की दूरी कम करने के लिए कांटो, केवराबहरा और कुर्थी जैसे गांवों में अतिरिक्त राशन दुकानें खोलने की भी मांग की गई है।

प्रमुख मांगें (एक नज़र में):
विद्युतीकरण: कछाड़ी से जोगिया और देवतीडांड में बिजली विस्तार।
सड़क: तुर्रीपानी से चंदहा और हराडीह से बड़गांव कला तक नवीन पक्की सड़क
शिक्षा व खेल: रजपुरी में प्राथमिक शाला और क्षेत्र के अधूरे सलगवां कैलाशपुर भैसवार रामगढ़ मिनी स्टेडियमों का निर्माण तत्काल चालू कर पूर्ण करना
रोजगार: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के नए अवसरों में वृद्धि।

प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं के विचार
​1. पुष्पेंद्र राजवाड़े (अध्यक्ष, कोरिया जन सहयोग समिति)
​"यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। 'हुंकार' का अर्थ ही है अपनी सोई हुई व्यवस्था को जगाना। हमने आज एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री तक यह संदेश पहुँचाया है कि बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं कोई खैरात नहीं, बल्कि हमारा अधिकार है। जब तक हर घर में रोशनी और हर गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुँच जाती, समिति चैन से नहीं बैठेगी।"

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2. अधिवक्ता जयचन्द सोनपाकर (कार्यकारी अध्यक्ष)
​"प्रशासनिक उदासीनता के कारण हमारे क्षेत्र के कई गांव जैसे लोलकी और उरांव पारा आज भी नक्शे से बाहर हैं। यह गंभीर अन्याय है। हम कानून की लड़ाई भी लड़ेंगे और सड़क की भी। राजस्व ग्राम घोषित करने और वन अधिकार पट्टे दिलाने की मांग को हम तार्किक और कानूनी अंजाम तक पहुँचाकर ही दम लेंगे।"

​3. रजा अली अंसारी (वरिष्ठ कानूनी सलाहकार)
​"लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। पंडो जनजाति के जाति प्रमाण पत्र और वन अधिकार पत्र जैसे मामलों में देरी करना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। प्रशासन को चाहिए कि वह विशेष शिविर लगाकर इन विसंगतियों को दूर करे, ताकि गरीब ग्रामीणों को अतिक्रमणकारी बताकर परेशान करने का सिलसिला बंद हो सके।"

​4. कृष्णा सिंह बाबा (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ)
​"एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते हम व्यवस्था का दर्पण हैं। क्षेत्र की मितानिन बहनों का मानदेय रोकना और जनसुविधाओं की अनदेखी करना दुखद है। पत्रकार जगत इस न्यायोचित मांग का पूरी तरह समर्थन करता है और हम इन समस्याओं को शासन की सर्वोच्च चौखट तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

​5. एस.के. रूप (संपादक)
​"सोनहत और आसपास के क्षेत्रों में विकास की गति थमी हुई है। अधूरे मिनी स्टेडियम और जर्जर सड़कें इसकी गवाह हैं। मीडिया के माध्यम से हम जनता की इस 'हुंकार' को इतनी मजबूती देंगे कि जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी कुर्सी से उठकर धरातल पर काम करना ही होगा। पंडो जनजाति का जाती प्रमाण पत्र तत्काल बने यदि इस बार पंडो जनजाति का जाती नही बनाया गया तो हम मामले को लेकर उच्च न्यायायलय की शरण लेंगे

​6. राजू साहू (उपाध्यक्ष)
​"दूरस्थ क्षेत्रों में राशन दुकानों और नेटवर्क की समस्या ने ग्रामीणों का जीवन कठिन बना दिया है। रामगढ़ क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का अभाव युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यह ज्ञापन एक शुरुआत है, जल्द समाधान नहीं मिला तो उग्र आंदोलन तय है।"

अनुभवी नेतृत्व का मार्गदर्शन: हुंकार को मिली नई धार

​7. राजन पाण्डेय (संरक्षक एवं मार्गदर्शक)
​"विकास की योजनाएं बंद कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि गांव की धूल और गलियों की जरूरतों को देखकर बननी चाहिए। आज भी हमारे क्षेत्र के ग्रामीण बुनियादी बिजली और सड़क के लिए तरस रहे हैं, जो आजाद भारत की विडंबना है। यह 'हुंकार' अभियान प्रशासन के लिए ध्यानाकर्षण का माध्यम भी है और आम आदमी के लिए अपने अधिकारों को पाने का आह्वान भी। हम इस अभियान के संरक्षक के रूप में अंतिम छोर के व्यक्ति को न्याय मिलने तक कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।"

​8. संजय साहू अधिवक्ता
​"शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं। जब स्कूल तक जाने के लिए सड़क न हो और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने वाली मितानिन बहनों को समय पर मानदेय न मिले, तो समाज का पिछड़ना तय है। हमने आज ज्ञापन के माध्यम से शासन को आईना दिखाया है। हमारा अनुभव कहता है कि जब जनता एकजुट होकर हुंकार भरती है, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को झुकना पड़ता है। अब समय आ गया है कि मांगों को पूरा किया जाए, न कि सिर्फ फाइलों में दबाया जाए।"

जन-सैलाब की गूँज: जब राजनीति पर भारी पड़ी जन-समस्याओं की 'हुंकार'

निश्चित रूप से, किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी भीड़ और जन-समर्थन से मापी जाती है। सोनहत के इतिहास में दर्ज हुई इस अभूतपूर्व भीड़ पर कुछ अलग ही कहानी कह रही है अक्सर राजनीतिक रैलियों और चुनावी सभाओं में संसाधनों के दम पर भीड़ जुटाई जाती है, लेकिन बुधवार को सोनहत की सड़कों ने जो मंजर देखा, उसने एक नया इतिहास रच दिया। कोरिया जन सहयोग समिति के "हुंकार" अभियान में उमड़ा जन-सैलाब इस बात का गवाह बना कि जब बात हक और अधिकार की आती है, तो जनता बिना किसी राजनीतिक प्रलोभन के स्वयं सड़कों पर उतर आती है।

क्षेत्र के जानकारों और बुजुर्गों की मानें तो सोनहत के इतिहास में गैर-राजनीतिक मंच पर इतनी विशाल भीड़ पहले कभी नहीं देखी गई। अमूमन बड़े राजनेताओं के दौरों में भी जो उत्साह नजर नहीं आता, वह बुधवार को आम जनता के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था। दूर-दराज के गांवों से पैदल, चार पहिया और निजी साधनों से पहुंचे ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया कि "हुंकार" अब केवल एक समिति का अभियान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज बन चुका है।

हक की लड़ाई में उमड़ा स्वतः स्फूर्त जन-समर्थन
यह भीड़ किसी दल के समर्थन में नहीं, बल्कि अंधेरे से आजादी, टूटी सड़कों के सुधार और अपने संवैधानिक अधिकारों (पट्टा व प्रमाण पत्र) के लिए आई थी। पंडो जनजाति के लोगों से लेकर मितानिन बहनों और युवाओं तक, हर वर्ग की उपस्थिति ने प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब फाइलों में विकास दिखाकर जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता।

सभा स्थल पर पहुचे तहसीलदार लिया ज्ञापन
कोरिया जन सहयोग समिति के सभा स्थल पर प्रशासन की ओर से तहसीलदार सोनहत संजय राठौर पहुचे वहां समिति के सदस्यों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा, और सारी समस्याओं को प्रशासन को अवगत कराया, इस दौरान तहसीलदार सोनहत ने कई समस्याओं के निराकरण का अश्वशन दिया और अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए ज्ञापन को शासन स्तर पर भेजने की बात कही, तहसीलदार सोनहत ने कई समस्याओं को सही मानते हुए उसके निराकरण के पूर्ण प्रयास किये जाने की बात कहीकार्यक्रम में अधिवक्ता जयचन्द सोनपाकर अधिवक्ता राजा अली अंसारी अधिवक्ता अरविंद सोनी, अधिवक्ता संजय साहू अधिवक्ता अवध यादव, छ ग श्रम जीवी पत्रकार कल्याण संघ के प्रदेश कार्यकारी कृष्णा सिंह बाबा, सम्पादक सम्वर्त कुमार रुप, पुष्पेंद्र राजवाड़े, समय लाल कमलवंशी, उपाध्यक्ष राजू साहू जय प्रकाश राजवाड़े, महा सचिव राज कुमार साहू सचिव उदय राज सिंह, सरपंच मेण्ड्रा कबीर दास , सोनमति साहू मितानिन संगठन, सुन्दरकली तिर्की, कौशिल्या राजवाड़े, प्रफुल पाण्डेय, बालकरन शब्बीर मोमिन मोहन यादव सहित कई लोग उपस्थित रहे










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