राम रक्षा स्तोत्र एक ऐसा दिव्य कवच है जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। भगवान राम की स्तुति में रचा गया यह स्तोत्र न केवल मन को शांति देता है, बल्कि जीवन की बाधाओं को दूर करने की शक्ति भी रखता है। राम रक्षा स्तोत्र की रचना ऋषि बुधकौशिक ने की थी। माना जाता है कि स्वयं भगवान शिव ने उनके सपने में आकर उन्हें इस स्तोत्र का ज्ञान दिया था।
राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें?
वैसे तो आप इसका पाठ कभी भी कर सकते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे के बीच) में इसका पाठ करना सबसे ज्यादा प्रभावी और फलदायी होता है। पाठ शुरू करने से पहले नहाकर साफ कपड़े धारण करें और भगवान राम के दरबार की छवि के सामने घी का दीपक जलाएं। पाठ करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।
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पाठ के चमत्कारी लाभ
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जो पूरी श्रद्धा के साथ राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता है, उसके चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बन जाता है।
भय और शत्रु से मुक्ति: यह स्तोत्र मन से डर को दूर भगाता है और दुश्मनों पर विजय प्राप्त करने में सहायक होता है।
मानसिक शांति और एकाग्रता: ज्योतिषीय विश्लेषणों में पाया गया है कि इसके नियमित जाप से मानसिक तनाव कम होता है और फैसले लेने की क्षमता में सुधार होता है।
स्वास्थ्य लाभ: इसे स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम माना गया है। विद्वानों का ऐसा संकेत है कि यह शारीरिक व्याधियों से लड़ने की आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यह बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से व्यक्ति की रक्षा करता है।
राम रक्षा स्तोत्र का भावार्थ
इस स्तोत्र में भगवान राम के शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। इसमें प्रभु के अलग-अलग नामों जैसे- राघवेन्द्र, रघुनंदन और दशरथनंदन का आह्वान किया गया है। ताकि, वे भक्त की हर परिस्थिति में रक्षा करें।
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