महाभारत के 3 सबसे भयानक श्राप! जिन्होंने युद्ध का अंत और इतिहास का रुख बदल दिया

महाभारत के 3 सबसे भयानक श्राप! जिन्होंने युद्ध का अंत और इतिहास का रुख बदल दिया

महाभारत सिर्फ एक महायुद्ध की गाथा नहीं है, बल्कि यह उन गहराइयों की कहानी है जहां एक शब्द भी पूरी नियति बदल सकता था। कुरुक्षेत्र के मैदान में जो कुछ भी हुआ, उसके पीछे केवल शूरवीरों का पराक्रम और रणनीतियां नहीं थीं, बल्कि बरसों पुराने वे 'श्राप' थे जो साये की तरह योद्धाओं का पीछा कर रहे थे।

1. परशुराम का कर्ण को श्राप

कर्ण, जिसे इतिहास के सबसे महान योद्धाओं में गिना जाता है, उसकी हार का सबसे बड़ा कारण शस्त्रों की कमी नहीं, बल्कि भगवान परशुराम का श्राप था। कर्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण कर परशुराम से विद्या सीखी थी। एक बार जब गुरु की निद्रा भंग न हो, इसलिए कर्ण ने अपने पैर पर कीड़े के काटने का असहनीय दर्द सहा, तब परशुराम समझ गए कि इतनी सहनशक्ति केवल एक क्षत्रिय में हो सकती है।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है 

प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, क्रोधित होकर परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया कि "जिस विद्या को तुमने झूठ बोलकर सीखा है, उसे तुम उस समय भूल जाओगे जब तुम्हें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी।" यही कारण था कि अर्जुन के सामने अंतिम समय में कर्ण अपना 'ब्रह्मास्त्र' नहीं चला सका और युद्ध का पासा पलट गया।

2. युधिष्ठिर का महिलाओं को श्राप
महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद जब माता कुंती ने पांडवों को बताया कि कर्ण उनका सबसे बड़ा भाई था, तो पांडव शोक में डूब गए। युधिष्ठिर इस बात से अत्यंत दुखी थे कि उन्होंने अनजाने में अपने ही ज्येष्ठ भाई का वध कर दिया।

उन्होंने माना कि अगर यह रहस्य उन्हें पहले पता होता, तो इतना बड़ा नरसंहार रुक सकता था। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इसी पीड़ा में युधिष्ठिर ने पूरी नारी जाति को यह श्राप दे दिया था कि "आज के बाद कोई भी महिला किसी भी रहस्य या बात को अपने भीतर छिपा कर नहीं रख पाएगी।" माना जाता है कि इसी श्राप के कारण आज भी यह कहावत प्रचलित है कि महिलाओं के पेट में बात नहीं पचती।

3. गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप

युद्ध समाप्त होने के बाद जब शोक में डूबे श्रीकृष्ण गांधारी के पास पहुंचे, तो अपने 100 पुत्रों के शवों को देखकर गांधारी का क्रोध फूट पड़ा। उन्होंने माना कि अगर कृष्ण चाहते तो यह युद्ध रुक सकता था। गांधारी ने कृष्ण को श्राप दिया कि "जिस तरह तुमने मेरे कुल का विनाश करवाया है, ठीक 36 साल के बाद तुम्हारे यदुवंश का भी इसी तरह आपसी कलह में विनाश हो जाएगा और द्वारका नगरी समुद्र में डूब जाएगी।"

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित संहिताओं के अनुसार, इस श्राप के कारण ही कृष्ण के जाने के बाद यदुवंशी आपस में लड़कर समाप्त हो गए और द्वापर युग का अंत होकर कलयुग का आगमन हुआ।










You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments