फरवरी का महीना आते-आते चना, मसूर, आलू, प्याज और लहसुन जैसी फसलें खेत से निकलने लगती हैं. जैसे ही खेत खाली होते हैं, किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब कौन-सी फसल लगाई जाए जिससे आमदनी बढ़े. ऐसे में हाइब्रिड टमाटर की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आ रही है.
अगर किसान थोड़ी सी प्लानिंग के साथ काम करें, तो फरवरी में ही नर्सरी तैयार कर मार्च से पहले खेत में पौध रोपाई कर सकते हैं. सही तकनीक अपनाने पर टमाटर से आराम से एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है.
सागर से देशभर में जा रहा टमाटर
सागर जिले में उगाया गया टमाटर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रहा है. व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंचकर थोक भाव में टमाटर खरीदते हैं. अगर औसतन 20 रुपये किलो का भाव भी मिल जाए, तो किसान की मेहनत पूरी तरह वसूल हो जाती है और अच्छा खासा मुनाफा हाथ आता है.
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उद्यानिकी अधिकारी विदेश प्रजापति बताते हैं कि अब टमाटर की खेती पुराने तरीकों से करने का समय नहीं रहा. आज ड्रिप और मल्चिंग तकनीक से खेती करना ही फायदे का सौदा है. फरवरी का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए एकदम सही माना जाता है.
प्रो-ट्रे में बीज डालने से करीब एक महीने में मजबूत नर्सरी तैयार हो जाती है. फरवरी में ट्रांसप्लांट करने पर मार्च के आखिरी हफ्ते या अप्रैल की शुरुआत में तुड़ाई शुरू हो जाती है. अभी जो जुलाई वाला टमाटर लगा है, वह फरवरी-मार्च तक खत्म हो जाएगा, ऐसे में नई फसल की बाजार में अच्छी मांग रहती है और अप्रैल से जून तक लगातार बिक्री होती है.
सही वैरायटी ही दिलाएगी अच्छा उत्पादन
टमाटर की खेती में वैरायटी का चुनाव सबसे अहम होता है. अगर बीज सही नहीं हुआ तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. इन दिनों 1546 और अधिराज जैसी वैरायटी किसानों में काफी प्रचलित हैं. इनमें वायरस का खतरा कम रहता है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है. कई वैरायटी में वायरस आने पर पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, इसलिए किसान अब सुरक्षित वैरायटी पर ही भरोसा कर रहे हैं.
अनुदान से घटेगी लागत, बढ़ेगा फायदा
जो किसान ड्रिप मल्चिंग से खेती शुरू करना चाहते हैं लेकिन लागत की चिंता है, उनके लिए उद्यानिकी विभाग बड़ी मदद दे रहा है. हाइब्रिड बीज से लेकर ड्रिप और मल्चिंग सिस्टम तक 45 से 55 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है.
एक एकड़ में मल्चिंग का खर्च करीब 20 हजार रुपये आता है, जिसमें 10 हजार तक का अनुदान मिल जाता है. सपोर्टिंग सिस्टम 15-16 हजार का होता है, जिसमें 8 हजार तक की सहायता मिलती है. ड्रिप सिस्टम की लागत 75-80 हजार होती है, जिसमें 35 से 40 हजार रुपये तक का अनुदान मिल सकता है.
कम पानी, ज्यादा पैदावार
ड्रिप मल्चिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि करीब 70 फीसदी कम पानी में टमाटर की खेती हो जाती है. फर्टिलाइजर भी ड्रिप के जरिए बूंद-बूंद सीधे पौधे तक पहुंचता है, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती. कम पानी और मल्चिंग की वजह से खरपतवार भी नहीं पनपते.
मल्चिंग से सूर्य की गर्मी का असर दोगुना हो जाता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और 45 से 50 दिन में ही फलन शुरू हो जाता है. यही वजह है कि आज समझदार किसान टमाटर की खेती से अपनी आमदनी लगातार बढ़ा रहे हैं.
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