परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद / छुरा : UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा जारी नए नियम दिनांक 13.01.2026 के विरोध में सवर्ण समाज छुरा ब्लॉक की एक आवश्यक बैठक नगर के मानस मंदिर प्रांगण में शनिवार को संपन्न हुई। बैठक में छुरा ब्लॉक अंतर्गत सवर्ण समाज के विभिन्न घटक समुदायों — ब्राह्मण, राजपूत, जैन, सिंधी, अग्रवाल, कायस्थ सहित अन्य समाजों के प्रमुखजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।बैठक में यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर विस्तार से चर्चा की गई। समाज के वक्ताओं ने कहा कि जिस देश का संविधान “न्याय” और “समानता” के सिद्धांतों पर आधारित है, वहां केवल आरोप के आधार पर सामान्य वर्ग के नागरिकों, कर्मचारियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को बिना सुने, बिना जांच और बिना दोष सिद्ध हुए अपराधी मान लिया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं अनुचित है। वक्ताओं का कहना था कि यदि आरोप असत्य भी सिद्ध हो जाए, तब भी आरोप लगाने वाले पक्ष पर किसी प्रकार की कार्रवाई का प्रावधान न होना न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
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बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सवर्ण समाज किसी भी अन्य वर्ग या संप्रदाय के विरुद्ध नहीं है, किंतु अपने ऊपर हो रहे कथित दमन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज के लोगों ने आशंका व्यक्त की कि यह नियम शिक्षा जगत में भय और असमानता का वातावरण उत्पन्न करेगा, जिससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा।सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सोमवार, 02 फरवरी 2026 को देश के प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम), छुरा को सौंपा जाएगा, जिसमें यूजीसी के उक्त नियम को वापस लेने की मांग की जाएगी। बैठक के अंत में समाज के प्रतिनिधियों ने सभी वर्गों से संविधानिक मूल्यों की रक्षा एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
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