फाल्गुन का महीना आज से शुरू ,ऐसे करें भगवान शिव और श्रीकृष्ण की आराधना

फाल्गुन का महीना आज से शुरू ,ऐसे करें भगवान शिव और श्रीकृष्ण की आराधना

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का अंतिम महीना फाल्गुन आज, 2 फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है। यह महीना न केवल वसंत के आगमन का प्रतीक है, बल्कि भक्ति, रंगों और उल्लास का अद्भुत संगम भी है। फाल्गुन महीने का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महीना देवों के देव महादेव और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए बहुत शुभ माना गया है।अगर आप इस महीने में सुख, शांति और समृद्धि की कामना रखते हैं, तो भगवान शिव और श्रीकृष्ण की भाव के साथ आरती करें। ऐसा करने से आपको उनकी खास कृपा मिलेगी।

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फाल्गुन माह के नियम 

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  2. इस महीने में अनाज का कम और फलों का अधिक सेवन करें।
  3. यह आनंद का महीना है, इसलिए वाणी में मधुरता रखें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें।
  4. इस दौरान भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें।
  5. इस दौरान तामसिक चीजों से दूर रहें।
  6. इस दौरान किसी के बारे में बुरा बोलने से बचें।
  7. इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य, पूजा-पाठ करें।

॥श्रीकृष्ण जी की आरती॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,

बजावै मुरली मधुर बाला ।

श्रवण में कुण्डल झलकाला,

नंद के आनंद नंदलाला ।

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली ।

लतन में ठाढ़े बनमाली

भ्रमर सी अलक,

कस्तूरी तिलक,

चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,

देवता दरसन को तरसैं ।

गगन सों सुमन रासि बरसै ।

बजे मुरचंग,

मधुर मिरदंग,

ग्वालिन संग,

अतुल रति गोप कुमारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,

सकल मन हारिणि श्री गंगा ।

स्मरन ते होत मोह भंगा

बसी शिव सीस,

जटा के बीच,

हरै अघ कीच,

चरन छवि श्री बनवारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,

बज रही वृंदावन बेनू ।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू

हंसत मृदु मंद,

चांदनी चंद,

कटत भव फंद,

टेर सुन दीन दुखारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

॥शिवजी की आरती॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।

हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

त्रिगुणस्वामी जी की आरति, जो कोइ नर गावे।

कहत शिवानंद स्वाम, सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...।।










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