रायपुर : रायपुर में बेरोजगारों से ठगी के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। अब रेलवे विभाग में एक नया मामला सामने आया है, जिसमें वेबटेक इंटरनेशनल JVLTD. कंपनी पर ठेका कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार और वेतन संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, इस कंपनी ने रेलवे में पूछताछ केंद्र, डिस्प्ले कंट्रोलर और माइक अनाउंसर की नौकरी बिना किसी प्लेसमेंट या जॉइनिंग लेटर के कर्मचारियों को दे दी।

कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग में पुराने और नए कर्मचारियों के बीच स्पष्ट भेदभाव किया जा रहा है। कुछ कर्मचारियों का PF बनाया गया, जबकि कुछ का नहीं बनाया गया। वहीं, किसी कर्मचारी को चार महीने काम कराया गया, किसी को तीन महीने, किसी को केवल दो महीने काम कराया गया। इसके बाद उन्हें सिर्फ एक माह की तनख्वाह दी गई और सुपरवाइज़र ने उनसे अर्धवेतन राशि वापस करने की मांग की। जब कर्मचारियों ने इस मनमानी के खिलाफ विरोध किया, तो कई ठेका कर्मचारियों को बिना किसी अग्रिम सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। पीड़ित कर्मचारियों ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए सीनियर DCM अवधेश द्विवेदी के पास अपील की।
हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि सीनियर अधिकारी ने उनका आवेदन सुने बिना ही उन्हें लताड़ते हुए कहा, “मेरे पास पैसों की बात लेकर मत आए। जिनका ठेका है और जो सुपरवाइज़र हैं उनके पास जाकर बात करें।” इस जवाब से कर्मचारियों में असंतोष और गुस्सा और बढ़ गया। कर्मचारियों ने बताया कि वेबटेक इंटरनेशनल JVLTD. के तहत काम करने वाले ठेका कर्मियों को नौकरी में समान अधिकार और वेतन का सुनिश्चित लाभ नहीं दिया गया। उनकी तनख्वाह में कटौती और उनके साथ सुपरवाइज़र का दमनकारी व्यवहार कर्मचारियों के लिए मानसिक तनाव का कारण बना। कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केवल पैसे की मांग पर ही नौकरी से निकाला गया, जबकि अन्य मुद्दों पर भी उन्हें किसी प्रकार की सुनवाई नहीं मिली।
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इस पूरे प्रकरण में रेलवे विभाग की अनदेखी और ठेका कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार की बात सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की समानता या न्याय सुनिश्चित करने की पहल नहीं की गई। पीड़ित कर्मचारी इस मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए आगे की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी यह भी बताते हैं कि कई बेरोजगार युवा इस कंपनी के भरोसे जॉब के लिए आए थे, लेकिन उन्हें न केवल समुचित वेतन नहीं मिला, बल्कि नौकरी की सुरक्षा भी नहीं दी गई। इससे बेरोजगार युवाओं का विश्वास रेलवे विभाग और निजी ठेकेदारों पर से उठता जा रहा है। इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे ठेका प्रणाली में कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियां हैं। इस प्रकरण में संबंधित अधिकारियों और ठेका कंपनी से जवाब मांगा जाना आवश्यक है, ताकि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा हो सके और भविष्य में इस तरह की ठगी की घटनाओं से बचा जा सके। राजधानी रायपुर में यह मामला बेरोजगारों और ठेका कर्मचारियों के हित में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है और रेलवे विभाग के अंदर जिम्मेदार और पारदर्शी प्रबंधन की मांग को और मजबूत करता है।
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