छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के एक गांव में रविवार शाम को हिंसा भड़क उठी। भीड़ ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के छह घरों में आग लगा दी। इस दौरान पुलिसकर्मियों की एक छोटी टीम ने कई बच्चों समेत 20 लोगों को बचाया।इसमें सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, दुत्कैय्या गांव में दंगे रविवार तड़के हुई घटनाओं की वजह से भड़के, जब चार अलग-अलग जगहों पर चार लोगों पर कथित तौर पर हमला किया गया और दो लोगों के मोबाइल फोन छीन लिए गए। इन घटनाओं में आरोपी तीन लोगों की पहचान दुत्कैय्या के आरिफ कुरैशी, सलीम खान और रायपुर के इमरान सिद्दीकी के तौर पर हुई है।
उसी दिन बाद में शाम 4 बजे से रात 11.30 बजे के बीच, कथित तौर पर दर्जनों ग्रामीणों ने अल्पसंख्यक समुदाय के छह घरों पर हमला किया। इस गांव में 100 से ज्यादा परिवार हैं। इनमें से लगभग 10 परिवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। पुलिस ने बताया कि 2024 में भी वहां सांप्रदायिक तनाव भड़क उठा था, जब कथित तौर पर एक धार्मिक प्रतीक का अपमान किया गया था। उस समय, तनाव बढ़ने पर लगभग 10 परिवार अपने घर छोड़कर चले गए थे, लेकिन शांति बैठक के बाद वे वापस लौट आए थे।
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया
पुलिस ने रविवार को बताया कि तीनों आरोपियों को शाम 6 बजे तक पकड़ लिया गया था। हालांकि, शाम 4 बजे तक एक समूह ने आरोपियों में से एक के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी। एडिशनल एसपी धीरेंद्र पटेल, एसडीओपी निशा सिन्हा और राजिम इंस्पेक्टर अमृत साहू समेत 34 पुलिसकर्मियों की एक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के मुताबिक, भीड़ में करीब 70 लोग थे, लेकिन जल्द ही लाठी, रॉड और पेट्रोल से लैस अन्य लोगों के शामिल होने से संख्या बढ़ गई। एक घंटे के भीतर एसपी वेदव्रत सिरमौर भी मौके पर पहुंच गए।
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पुलिस टीम पर हमला
मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने नाम न बताने की शर्त इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "उन्होंने हमें लाठियों से पीटा और हमारे हाथों, पीठ और सिर पर वार किए। उन्होंने हमारे हेलमेट तोड़ दिए और हमारी गाड़ियों के साथ-साथ फायर ब्रिगेड की गाड़ियों पर भी पत्थर फेंके। हमने उन पर लाठीचार्ज नहीं किया क्योंकि हमारी संख्या कम थी और हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि किसी की जान न जाए।"
पुलिस दल ने हमला झेल रहे घरों की सुरक्षा की और करीब 20 लोगों को बस में बिठाकर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। पुलिसकर्मी ने बताया, "कुछ समय बाद हमें सूचना मिली कि छह-सात बच्चे एक मदरसे में हैं। हम उन्हें पुलिस वैन में ले गए। मदरसे पर हमला नहीं हुआ, लेकिन उसके बाहर रखे कूलर में तोड़फोड़ की गई और उसके पास खड़ी एक साइकिल और घरों को आग लगा दी गई।"
पुलिस को रात 8 बजे और फिर रात 9 बजे ज्यादा फोर्स मिली। इससे उनकी कुल संख्या लगभग 90 हो गई। एक पुलिस सूत्र ने बताया, "राजिम मेला चल रहा है और वहां भारी सुरक्षा बल तैनात थे। अतिरिक्त बल मिलने के बाद हमने भीड़ को पीछे धकेल दिया।" हालांकि, भीड़ ने छह घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी, साथ ही एक कार और दो बाइक को भी नष्ट कर दिया। हमले में घायल हुए दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गांव में भारी फोर्स तैनात
एक अधिकारी ने बताया, "रात 11:30 बजे तक दंगा खत्म हो गया था और पुलिसकर्मियों ने अपने हेलमेट उतार दिए थे। इसी दौरान एक महिला ने ईंट फेंकी, जिससे एक पुलिसकर्मी के सिर में चोट आ गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमने उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है।" सोमवार शाम को गांव में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। हत्या के प्रयास, दंगा और आगजनी के आरोप में कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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