उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक किसान ने वो कमाल कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब हर जुबान पर है. वजीरगंज के रहने वाले ओंकार सिंह ने साबित कर दिया है कि अगर किसान अपनी सोच बदल ले, तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती. जहां आज के दौर में युवा नौकरी के लिए शहरों की ठोकरें खा रहे हैं, वहीं ओंकार सिंह ने अपनी पुश्तैनी जमीन को ही ‘खजाना’ बना दिया है. उन्होंने ‘बहुफसली खेती’ (Multi-Cropping) का ऐसा जादुई फॉर्मूला अपनाया है कि उनके एक ही खेत से तीन-तीन फसलों की कमाई हो रही है.
सरकारी नौकरी को मारी ठोकर, अब मिट्टी उगल रही पैसा
ओंकार सिंह ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. डिग्री मिलने के बाद अक्सर लोग दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, लेकिन ओंकार सिंह का इरादा कुछ और ही था. उन्हें शुरू से ही कुछ अपना और बड़ा करना था. उन्होंने देखा कि पारंपरिक खेती में मेहनत बहुत है लेकिन बचत नाममात्र की. बस फिर क्या था, उन्होंने तय किया कि वो अपनी जमीन पर गेहूं-धान के बजाय फलों का बाग लगाएंगे. उन्होंने अपनी साढ़े तीन साल की मेहनत से एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसे देखने अब दूर-दूर से लोग आ रहे हैं.
‘ताइवान’ की तकनीक ने बदली किस्मत
उन्होंने बताया कि इस आधुनिक खेती का आइडिया उन्हें यूट्यूब से मिला. उन्होंने देखा कि कैसे एडवांस किसान एक ही जमीन का कई तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं. ओंकार सिंह ने ताइवान पिंक और रेड डायमंड जैसे शानदार ‘अमरूद’ के साथ-साथ ताइवान वैरायटी का ‘पपीता’ और वियतनामी ‘सुपर कटहल’ लगाया. ये ऐसी किस्में हैं जो बहुत जल्दी फल देने लगती हैं और बाजार में इनकी कीमत भी बहुत अच्छी मिलती है.
लागत 1 लाख और मुनाफा हर साल 5 लाख
ओंकार सिंह ने अपनी खेती का जो हिसाब बताया है, वो किसी को भी दंग कर सकता है. उन्होंने लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर यह बाग लगाया है.
शुरुआती खर्च: खेत की तैयारी और पौधों की रोपाई में कुल जमा 1 लाख रुपये की लागत आई. वहीं, पपीता जहां साल के भीतर ही फल देकर कमाई शुरू कर देता है, वहीं अमरूद और कटहल लंबे समय तक बम्पर मुनाफा देते हैं.
सालाना इनकम: आज ओंकार सिंह अपनी इस छोटी सी जमीन से साल भर में 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
जमीन का एक इंच भी बेकार नहीं, अब बढ़ाएंगे अपना दायरा
बहुफसली खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जमीन का कोई भी हिस्सा खाली नहीं रहता. बड़े पेड़ों के बीच की खाली जगह में छोटे पौधे फल देते रहते हैं. ओंकार सिंह की इस कामयाबी ने यह साफ कर दिया है कि अगर सही वैरायटी और सही तकनीक चुनी जाए, तो खेती से बड़ा कोई बिजनेस नहीं है.
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