नई दिल्ली : पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि बलूचिस्तान में सुरक्षा बल बलूच विद्रोहियों के खिलाफ 'खुद को अपाहिज' महसूस कर रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पिछले तीन दिनों में बलूचिस्तान में हुए बलूच हमलों में कई सैनिक मारे गए हैं।
नेशनल असेंबली में आसिफ ने कहा, ''बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। इस पर नियंत्रण किसी घनी आबादी वाले शहर या क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक कठिन है और इसके लिए भारी संख्या में बलों की तैनाती की आवश्यकता है। हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा और गश्त करने में वे शारीरिक रूप से असमर्थ हैं।''
आसिफ ने प्रांत में गंभीर सुरक्षा स्थिति के बीच सुरक्षा बल के सामने आने वाली भौगोलिक चुनौतियों का वर्णन किया। ख्वाजा आसिफ ने बीएलए के साथ बातचीत से इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार समूह के साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी।
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पाकिस्तान हमारे बारे में बार-बार गलत नैरेटिव गढ़ रहा- बलूच नेता
एएनआई के अनुसार, बलूच स्वतंत्रता समर्थक नेता हुरबैर मर्री ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और राजनीतिक वर्ग पर बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को बदनाम करने के लिए बार-बार नए नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास लगातार विफल रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने शुरू में बलूच संघर्ष को सोवियत संघ द्वारा समर्थित कम्युनिस्ट आंदोलन के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया। उसके बाद सरकार ने अपना ध्यान ''तीन सरदारों के मिथक'' पर केंद्रित कर दिया, जिसमें कुछ ही कबालियाई नेताओं को बलूचिस्तान में अशांति का एकमात्र कारण बताया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अब नया तर्क अपना लिया है, जिसमें बलूच स्वतंत्रता के समर्थकों को भारत के भाड़े के एजेंट बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये आरोप झूठे और क्षणभंगुर हैं।
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