वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में वार्ता करने पर सहमति जता दी है, हालांकि बातचीत के एजेंडे को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं।अमेरिकी पक्ष जहां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन और आंतरिक नीतियों जैसे मुद्दों को भी चर्चा में शामिल करना चाहता है, वहीं तेहरान केवल अपने परमाणु कार्यक्रम तक बातचीत सीमित रखने पर अड़ा हुआ है।
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हो रही है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। क्षेत्रीय देशों को आशंका है कि किसी भी गलत कदम से व्यापक युद्ध की स्थिति बन सकती है। हाल के दिनों में वार्ता के स्थान और दायरे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अंतत: दोनों पक्षों ने इस्तांबुल की बजाय ओमान में बैठक करने पर सहमति दी।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वार्ता व्यापक मुद्दों पर होनी चाहिए, जबकि ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि उनका मिसाइल कार्यक्रम चर्चा से बाहर है।
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ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और इजराइल पहले उस पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश का आरोप लगाते रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हो सकते हैं। ईरान ने ओमान को इसलिए प्राथमिकता दी क्योंकि पहले भी यहां परमाणु मुद्दों पर सीमित दायरे में बातचीत होती रही है।
पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने, ड्रोन और नौसैनिक घटनाओं तथा आपसी धमकियों ने तनाव को और बढ़ाया है। इन परिस्थितियों के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से तेल बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एजेंडे पर सहमति नहीं बनती है तो वार्ता पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं, हालांकि दोनों पक्ष फिलहाल संवाद की राह खुली रखना चाहते हैं।
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