नई दिल्ली : बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसमें पार्टी ने अपना भारत विरोधी सुर बदलते हुए पड़ोसी देशों के साथ ''रचनात्मक'' और ''शांतिपूर्ण'' संबंधों का वादा किया है। इसने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है कि वह भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों के साथ ''पारस्परिक सम्मान और निष्पक्षता'' के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंध बनाना चाहती है।
उधर, महिलाओं पर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने सुलह का रुख अपनाते हुए कहा कि सत्ता में आने पर महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक होगा।
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मु्स्लिम जगत से संबंधों को मजबूत करने पर प्राथमिकता
हाल ही में रहमान ने अपने एक्स पोस्ट में कहा था कि आधुनिकता के नाम पर घरों से बाहर भेजी जा रहीं महिलाएं शोषण, नैतिक पतन और असुरक्षा का शिकार हो रही हैं, जिसे उन्होंने ''वेश्यावृत्ति का एक और रूप'' बताया था। उनकी टिप्पणियों की राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक निंदा हुई थी।
बहरहाल, घोषणापत्र के अनुसार, ''पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध बनाए जाएंगे, जो आपसी सम्मान और निष्पक्षता पर आधारित होंगे।'' दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तृत विदेश नीति ढांचे में जमात ने पाकिस्तान का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया है, जो कि एक उल्लेखनीय कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
पार्टी ने मुस्लिम जगत के साथ संबंधों को मजबूत करने को अपनी प्राथमिकता बताया है। साथ ही, विकसित देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जापान और कनाडा के साथ ''परस्पर लाभकारी'' संबंधों को बढ़ावा देने की बात कही है। जमात ने पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के विस्तार का लक्ष्य रखा है।
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