अगर आप भी टमाटर की अच्छी फसल उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. टमाटर की खेती के लिए खेत की गहरी जुताई कर 15 से 20 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी में जान आ जाती है. अच्छी जल निकासी टमाटर के पौधों को बीमारियों से दूर रखती हैं.
हालांकि, 80 से 90 सेंटीमीटर चौड़ी बेड प्रणाली अपनाने से पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती रहती हैं. पौध से पौध की दूरी 1 से 1.5 फीट और बेड से बेड की दूरी 5 से 5.5 फीट रखने से ग्रोथ तेज़ होती है. यह तरीका उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता हैं.
बलिया के फेमस कृषि एक्सपर्ट प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, रोपाई के समय गोबर की खाद के साथ फास्फोरस और पोटाश देना चाहिए, जबकि यूरिया की मात्रा कम रखना बेहतर विकल्प है. हां फूल आने पर बची हुई यूरिया और बोरॉन का छिड़काव फल की संख्या और गुणवत्ता दोनों को बढ़ा सकती है. संतुलित पोषण से पौधे मजबूत और सुंदर फल बनते हैं.
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मल्चिंग शीट लगाने से खेत में नमी बनी बरकरार रहती है, इससे खरपतवार भी नहीं पनपते है. ड्रिप सिंचाई से 50% तक पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में नमी मिलती है. इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और खर्च भी कम हो जाता हैं.
टमाटर के पौधों को बांस, रस्सी या सुतली से सहारा देने से फल जमीन को नहीं छूते और सड़ने से बचते हैं. सफेद मक्खी, फल छेदक और लीफ माइनर जैसे कीटों के लिए नीम तेल का छिड़काव कारगर और सुरक्षित उपाय माना जाता है. हालांकि बलिया जनपद के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़की सेरिया गांव निवासी किसान विनय कुमार साह टमाटर की खेती कर खूब मुनाफा कमा रहे हैं.
एक्सपर्टों की माने तो, अर्का रक्षक और अर्का सम्राट जैसी किस्में रोग प्रतिरोधी और लंबे समय तक फल देने वाली हैं. नामधारी 4266, नवीन-152 और परी वैरायटी किसानों में बेहद लोकप्रिय हैं, जो कम समय में 1200 से 1400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज और लाखों का मुनाफा देती हैं.
इसके अलावा, पूसा सदाबहार, पूसा रोहिणी, पंत टी-10 और हिसार ललित जैसी किस्में भी शानदार प्रदर्शन करती हैं. ये गर्मी सहन करने वाली और अच्छी उत्पादन क्षमता वाली हैं. कुल मिलाकर, सही किस्म और तकनीक अपनाकर टमाटर की खेती किसानों के लिए सोने की खान बन सकती है. थोड़ी सी सावधानी बरत किसान मालामाल बन सकते हैं.
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