छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोप में लगभग एक साल तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में रहेंगे.सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय यह शर्त लगाई है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे.
4 फरवरी 2026 को रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद 6 फरवरी को न्यायालय में पेश हुए. इस दौरान उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि वे अब उड़ीसा के मलकानगिरी में निवास करेंगे. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह उनकी पहली पेशी थी. मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को ईडी की विशेष अदालत में होगी.
मलकानगिरी को ही क्यों चुना कवासी लखमा ने?
कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता माने जाते हैं. वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं. लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका प्रभाव पड़ोसी राज्य उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में भी है.
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मलकानगिरी और कोंटा दोनों ही सीमावर्ती इलाके हैं और इनके बीच की दूरी मात्र 20 से 25 किलोमीटर है. नजदीकी क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक संपर्क बनाए रखना आसान होता है. माना जा रहा है कि इसी वजह से कवासी लखमा ने मलकानगिरी को अपना ठिकाना चुना है.
बजट सत्र में शामिल होने की मांग
सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत के चलते कवासी लखमा फिलहाल छत्तीसगढ़ में निवास नहीं कर सकते. ऐसे में उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को आवेदन सौंपा है.
कवासी लखमा ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बजट सत्र में शामिल होने की मांग रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय में निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को दिया है कि वे बजट सत्र में शामिल हो सकते हैं या नहीं. गौरतलब है कि शराब घोटाले के मामले में कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था.
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