रायपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर की एक चिट्ठी ने एक बार फिर सत्ता और संगठन के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बार ननकी राम कंवर ने राज्य के मुख्य सचिव विकासशील को पत्र लिखकर लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। पत्र सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि विजय कुमार भतपहरी ने लोक निर्माण विभाग में विभिन्न पदों पर रहते हुए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है, जिससे न केवल विभाग को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि शासन की छवि भी प्रभावित हुई है। उन्होंने लिखा है कि भतपहरी ने अपने चहेते ठेकेदारों को नियमों को दरकिनार कर अनुचित लाभ पहुंचाया और कमीशनखोरी के जरिए अवैध कमाई की।
ACB और EOW में पहले से दर्ज हैं मामले पत्र में उल्लेख किया गया है कि विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर में पहले से ही आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। वर्ष 2011 में अपराध क्रमांक 56/2011 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ई) एवं 13(2) के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध किया गया था। इसके बाद वर्ष 2015 में अपराध क्रमांक 45/2015 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के अंतर्गत एक और मामला दर्ज हुआ। ननकी राम कंवर का आरोप है कि इन गंभीर मामलों के बावजूद राजनीतिक पहुंच और प्रभाव के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और जांच को जानबूझकर लंबित रखा गया। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बताया है।
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डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल पूर्व गृह मंत्री ने अपने पत्र में लोक निर्माण विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 की स्थिति में अधीक्षण अभियंता सिविल की समीक्षा डीपीसी आयोग द्वारा कराए जाने की प्रक्रिया 27 दिसंबर 2010 से लंबित है। आरोप है कि डीपीसी बैठकों के दौरान कई भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लंबित मामलों को छिपाकर उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया। कंवर ने लिखा है कि संघ द्वारा इस संबंध में बार-बार आयोग और प्रशासनिक विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोक निर्माण विभाग में पदस्थ अन्य अभियंताओं के बीच आयोग और पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
2003 के सड़क निर्माण मामले का भी जिक्र पत्र में विजय कुमार भतपहरी के पूर्व कार्यकाल से जुड़े एक गंभीर मामले का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि वर्ष 2003 में कार्यपालन अभियंता के रूप में राजनांदगांव संभाग में पदस्थ रहते हुए मानपुर–संबलपुर मार्ग (51 किलोमीटर) के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं हुईं। इस सड़क निर्माण के लिए 695.94 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति के विरुद्ध लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस मामले की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) को जांच के निर्देश दिए गए थे। मुख्य तकनीकी परीक्षक कार्यालय द्वारा 4 जुलाई 2006 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में यह सामने आया कि 4.37 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च की गई थी और तीन माह की मस्टर रोल पुस्तिका का गायब होना भी गंभीर मामला था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
CBI जांच और पद से हटाने की मांग
पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने मुख्य सचिव से स्पष्ट रूप से मांग की है कि विजय कुमार भतपहरी को तत्काल उनके पद से हटाया जाए। साथ ही उनके खिलाफ लोक निर्माण विभाग, ACB और EOW में लंबित सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। कंवर ने नियम विरुद्ध ठेकेदारों को पहुंचाए गए लाभ से शासन को हुए नुकसान की वसूली की मांग भी की है। सबसे अहम मांग यह है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। इस पत्र के सामने आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल, ननकी राम कंवर की चिट्ठी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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