नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा में ऐसे कई किस्से और कहानियां जिनका अंदाज बिल्कुल अलग रहा, लेकिन इन किस्से कहानियों ने भी इतिहास रचा। साल 1963 में आया एक गाना मानो हर किसी की आंखों में आंसू दे गया, लेकिन इस गाने के बनने के पीछे की कहानी इतनी अलग थी कि ये आप सोच भी नहीं सोच सकते। चलिए आपको आर रूबरू कराते हैं उसी ऐतिहासिक गाने के उस हिस्से से, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
ऐसे बना था पहला सुपरहिट देशभक्ति गाना
जब भी देशभक्ति गानों की बात आती है तो एक गाना जेहन में सबसे पहले आता है और वो गाना है 'ऐ मेरे वतन के लोगों'। ये गाना महज एक गाना नहीं है बल्कि हर हिंदुस्तानी की एक भावना है। गाने की कहानी जितनी अद्भुत है तो वहीं इस गाने की रचना भी शानदार है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गाने को सिगरेट की डिब्बी के पैकेट पर लिखा गया था। दरअसल बात 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान की है। पूरे देश में युद्ध के बाद तनावपूर्ण और गमगीन माहौल ही था।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
मशहूर गीतकार कवि प्रदीप कुमार (Pradeep Kumar) एक दिन मुंबई के माहिम बीच पर ऐसे ही टहल रहे थे। इसी बीच उनके दिमाग में कुछ पंक्तियां तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया कि कहां लिखें। ना तो उनके पास कोई पेपर था और ना कोई पेन। इसके बाद उन्होंने अपने पास में ही खड़े शख्स से पेन उधार मांगा और कहा कि मैं अभी देता हूं पेन।
अब पेन मिल गया लेकिन कागज नहीं था, तो उन्होंने अपनी जेब से सिगरेट की डिब्बी निकाली और उसका कागज फाड़ा और उस कागज पर कुछ लाइनें लिखीं। ये लाइनें थीं... "ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा... यह शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा..."। 1990 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान खुद कवि प्रदीप ने इस किस्से के बारे में बताया था।
लता दीदी ने दी गाने को आवाज
कवि प्रदीप ने जिक्र किया था कि, गाना लिखने के कुछ दिन बाद ही उनके पास फिल्ममेकर महबूब खान का कॉल आया। उन्होंने कहा कि युद्ध को देखते हुए दिल्ली में एक चैरिटी प्रोग्राम होना और इसी के लिए एक गीत लिख दें। उस दौरान कवि प्रदीप को अपनी सिगरेट की डिब्बी पर लिखी हुई पक्तियां याद आ गईं।
इसके बाद फिर क्या था, उन्होंने उस पूरे गीत को पूरा लिखा और इसे कंप्लीट कर दिया। कवि प्रदीप ने गीत लिखने के बाद संगीत तैयार करने के लिए तब के जाने-माने संगीतकार सी रामचंद्र से संपर्क साधा फिर आखिर में जाकर लता दीदी ने इस गाने को आवाज दी।
गाना सुन रोए थे जवाहरलाल नेहरू और देशवासी
आखिरकार 26 जनवरी 1963 का वो दिन आया जब इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। हालांकि पहले लता दीदी ने इस गाने को अपनी आवाज देने से इंकार कर दिया था। हालांकि बाद में वो इस गाने को गाने के लिए राजी हो गईं थीं। जब लता मंगेशकर मंच से इस गाने को गाया तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
इतना ही नहीं जब लता दीदी इस गाने को गा रही थीं तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखों से आंसू आ रहे थे। जब गाना खत्म हुआ, तो उन्होंने लता मंगेशकर को अपने पास बुलाया और कहा कि, "बेटी, आज तुमने मुझे रुला दिया।"
आपको बता दें कि,इस गाने को सी. रामचंद्र ने अपने संगीत से सजाया था और लता मंगेशकर ने इसे आवाज दी थी। भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में इस गीत को गाया गया, जो आज भी लोगों के दिलों में रचा-बसा हुआ है।
वैसे एक इत्तेफाक यह भी है कि, कवि प्रदीप (Kavi Pradeep) की आज बर्थ एनिवर्सरी है, तो वहीं लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आज डेथ एनिवर्सरी है और सिनेमा के इन महान सितारों का नाम सदियों तक यूं ही याद किया जाएगा।
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments