असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इस बार उनका फोकस होंगे चाय बगानों में काम करने वाले छत्तीसगढ़ मूल के मतदाता. अप्रैल में होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव को नौ विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी है.
वहीं कांग्रेस भी पीछे नहीं हैं. पार्टी ने इस असम के आगामी चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीनियर आब्जर्वर बनाया है. यह पूरा घटनाक्रम असम में हो रहा है, जहां दशकों से बसे छत्तीसगढ़ी श्रमिक कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं. चुनाव की बिसात बिछते ही दोनों दलों ने छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है.
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बीजेपी ने अरुण साव पर जताया भरोसा
बीजेपी आलाकमान ने असम की जिन 9 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी अरुण साव को दी है, वहां छत्तीसगढ़ मूल के मतदाता प्रभावी माने जाते हैं. साव इन क्षेत्रों में विधानसभावार सांगठनिक बैठकें करेंगे और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय मजबूत करेंगे. ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे और कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले अरुण साव का असम प्रवास चुनाव संपन्न होने तक लगातार बना रहेगा. उनका फोकस प्रशासनिक पकड़ के साथ-साथ संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर रहेगा. बीजेपी का मानना है कि छत्तीसगढ़ी श्रमिकों और प्रवासी मतदाताओं से सीधा संवाद पार्टी को निर्णायक बढ़त दिला सकता है.
भूपेश बघेल पर कांग्रेस खेल रही दांव!
कांग्रेस ने भी असम चुनाव में छत्तीसगढ़ के नेताओं पर भरोसा जताया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पार्टी ने सीनियर आब्जर्वर नियुक्त किया है और वे पहले ही असम दौरे कर जमीनी फीडबैक ले चुके हैं. उनके साथ विकास उपाध्याय को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है, जो पिछले पांच सालों से असम कांग्रेस के प्रभारी सचिव हैं. इस बार उन्हें 50 विधानसभा सीटों का प्रभार सौंपा गया है. कांग्रेस ने इसके अलावा चार से पांच अन्य नेताओं को भी पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि अनुभवी नेताओं की टीम चुनावी रणनीति को धार देगी.
छत्तीसगढ़ी मतदाता क्यों बने केंद्र
असम के चाय बगानों में काम करने वाले लाखों श्रमिक मूल रूप से छत्तीसगढ़ से हैं और अब वे वहां स्थायी रूप से बस चुके हैं. कई विधानसभा सीटों पर यही वर्ग हार-जीत का अंतर तय करता है. इसी कारण भाजपा अरुण साव के जरिए संगठन और प्रशासनिक पकड़ मजबूत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान और किसान नेता की छवि को आगे कर रही है. दोनों दल आने वाले दिनों में और मंत्रियों तथा वरिष्ठ नेताओं को असम के चुनावी समर में उतार सकते हैं. साफ है कि असम चुनाव में छत्तीसगढ़ के दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.
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