राजिम मेला बना समाज निर्माण का मंच, शिक्षा और निर्भीक पत्रकारिता के योद्धा हुए सम्मानित

राजिम मेला बना समाज निर्माण का मंच, शिक्षा और निर्भीक पत्रकारिता के योद्धा हुए सम्मानित

संतों का संदेश—शिक्षा और पत्रकारिता मजबूत होगी, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा

 

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन राजिम कुंभ कल्प मेला के मंच से शिक्षा व्यवस्था और लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर अच्छा संदेश दिया गया। श्री राष्ट्रीय संत सुरक्षा परिषद छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षा और पत्रकारिता को समाज की रीढ़ बताते हुए समाज और व्यवस्था को सीधा आईना दिखाया गया।कार्यक्रम में परिषद के प्रदेश अध्यक्ष संत उमेशानंद गिरि महाराज एवं प्रदेश सचिव संत अंजनी नंदन शरण महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक हेमलाल ध्रुव तथा सामाजिक मुद्दों पर निर्भीक पत्रकारिता करने वाले पत्रकार परमेश्वर राजपूत को सम्मानित किया।

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समारोह को संबोधित करते हुए संत उमेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि आज जब सरकारी योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बावजूद ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा पर सुधार की जरूरत है, तब शिक्षक हेमलाल ध्रुव जैसे समर्पित शिक्षक व्यवस्था के भीतर रहकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें वास्तव में शिक्षा को संवारना चाहती हैं तो ऐसे शिक्षकों को संरक्षण और सम्मान देना होगा।
प्रदेश सचिव संत अंजनी नंदन शरण महाराज ने पत्रकारिता को लेकर कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज समाज और देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे है उन्होंने कहा कि पत्रकार परमेश्वर राजपूत जैसे सामाजिक पत्रकार, जो ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्गों की आवाज बनकर सच्चाई सामने लाते हैं, वही असली लोकतंत्र के प्रहरी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि निर्भीक पत्रकारिता कमजोर नहीं होनी चाहिए।

संतों ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा और पत्रकारिता दोनों ही देश की रीढ़ है। जो लोग ईमानदारी से समाज के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें संत समाज का संरक्षण और समर्थन मिलता रहेगा।
सम्मान ग्रहण करते हुए शिक्षक हेमलाल ध्रुव एवं पत्रकार परमेश्वर राजपूत ने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत नहीं बल्कि उस संघर्ष का सम्मान है, जो शिक्षा सुधार और सामाजिक सरोकारों वाली पत्रकारिता के लिए लगातार किया जा रहा है।इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग उपस्थित रहे। राजिम कुंभ कल्प मेला का यह मंच केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र को दिशा देने वाला वैचारिक मंच बनकर उभरा।










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