छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा शनिवार को सुकमा पहुंचे. जबकि जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वे छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे.इसके बावजूद कवाली लखमा का सुकमा में दिखाई देना चर्चा का विषय बना रहा. हालांकि इस पर उन्होंने अपनी सफाई भी दी है. उनके सुकमा आगमन पर तोंगपाल से लेकर सुकमा तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जगह-जगह जोशीला स्वागत किया. काफिले के साथ भारी भीड़, नारेबाजी और आतिशबाजी देखने को मिली.
जिला मुख्यालय के बस स्टैंड परिसर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कवासी लखमा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन करेंगे. उन्होंने कहा, मैं बस्तर का नेता हूं... आदिवासियों के अधिकार और क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा संघर्ष किया है. ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.
भाजपा पर तीखा हमला
पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दो साल में भाजपा की डबल इंजन सरकार फेल साबित हुई है. हिंदू के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा ने मंदिरों के विकास के लिए कुछ नहीं किया. कांग्रेस सरकार में मेरे कार्यकाल के दौरान रामाराम मंदिर के लिए 3 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी और छिंदगढ़ में मंदिर निर्माण कराया गया. उन्होंने यह भी कहा कि छिंदगढ़ में पहले एक सोसायटी थी, उनके प्रयास से 5 नई सोसायटियां खोली गईं.
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कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि स्थानीय भाजपा संगठन प्रशासन पर दबाव बनाकर काम करा रहा है. आश्रम-छात्रावासों से वसूली हो रही है. उन्होंने कहा कि दो साल में एक भी नया आश्रम, कॉलेज या सामुदायिक भवन नहीं खोला गया. सरकार केवल जंगल बेच रही है.
मलकानगिरी से करेंगे कोंटा विस की सेवा
लखमा ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए वे छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे. उन्होंने कहा कि मैं ओडिशा के मलकानगिरी जिला में रहकर कोंटा विधानसभा की जनता की सेवा करूंगा. तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन अपनी सुविधा के लिए वहां नहीं जाऊंगा. जनता के करीब रहना मेरी प्राथमिकता है. सभा के अंत में लखमा ने दोहराया कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन बस्तर, आदिवासी अधिकार और विकास की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी.
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