आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज परिक्षेत्र छुरा का वार्षिक अधिवेशन हर्षोल्लास के साथ संपन्न,जल-जंगल-जमीन संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक समरसता पर दिया गया जोर

आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज परिक्षेत्र छुरा का वार्षिक अधिवेशन हर्षोल्लास के साथ संपन्न,जल-जंगल-जमीन संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक समरसता पर दिया गया जोर

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद :आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज परिक्षेत्र (सर्कल) छुरा के अंतर्गत आश्रित ग्राम पेण्ड्रा में समाज का वार्षिक अधिवेशन बड़े ही हर्षोल्लास, गरिमामय वातावरण एवं सामाजिक एकता के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन में समाज के वरिष्ट पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, युवाओं एवं ग्रामीणजनों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।कार्यक्रम के प्रथम सत्र की शुरुआत समाज के आराध्य प्रकृति शक्ति बड़ादेव की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत, सम्मान एवं उद्बोधन संपन्न हुआ। मंच से समाज के उत्थान, संस्कृति संरक्षण एवं भावी दिशा पर सारगर्भित विचार रखे गए।इस अवसर पर पन्ना लाल ध्रुव, प्रदेशाध्यक्ष, आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज (छत्तीसगढ़) ने अपने संबोधन में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उन्नत खेती, स्वरोजगार और व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ें तथा आधुनिक तकनीक को अपनाकर आत्मनिर्भर बनें।

पूरन सिंह ठाकुर, जिलाध्यक्ष, आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज, गरियाबंद ने समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि संगठित समाज ही अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा कर सकता है।वहीं गंगाराम नेताम, सलाहकार, आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज जिला गरियाबंद ने सामाजिक संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि एकजुटता, अनुशासन और निरंतर संवाद से ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।कार्यक्रम में विशेष रूप से शिक्षक हेमलाल ध्रुव ने समाज के तीन प्रमुख सामाजिक संस्कार—जन्म संस्कार, विवाह संस्कार एवं मृत्यु संस्कार को अपनी पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप एवं फिजूलखर्ची से मुक्त रखने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा को समाज के विकास का मुख्य आधार स्तंभ बताते हुए शत-प्रतिशत शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक परिवार से संकल्प लेने की अपील की।

अधिवेशन के दौरान समाज के सामाजिक पदाधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ खेल, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के प्रतिभाशाली युवक-युवतियों को मंच से सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।सम्मान समारोह के पश्चात सभी उपस्थितजनों के लिए भोजन-प्रसादी का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सामाजिक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें समाज की समस्याओं, सुझावों एवं भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में अतिथियों की विदाई के साथ अधिवेशन के समापन की घोषणा की गई।यह वार्षिक अधिवेशन समाज में एकता, जागरूकता और आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ, वहीं युवाओं के लिए नई दिशा और प्रेरणा का स्रोत भी बना।










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