चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि देवी मां शीतला को समर्पित है। इससे एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। आसान शब्दों में कहें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के एक दिन बाद शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर जगत की देवी मां शीतला की भक्ति भाव से पूजा की जाती है।
धार्मिक मत है कि देवी मां शीतला की पूजा करने से आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है। साथ ही सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। आइए, शीतला सप्तमी और अष्टमी की सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
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शीतला सप्तमी शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को देर रात 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार यानी उदया तिथि से 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी पर पूजा के लिए शुभ समय 10 मार्च को सुबह 06 बजकर 24 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 26 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं। वहीं, बुधवार 11 मार्च को बसोड़ा मनाया जाएगा।
शीतला सप्तमी शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इस दिन हर्षण योग का संयोग सुबह 08 बजकर 21 मिनट तक है। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग है। इन योग में मां शीतला की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता एवं सिद्धि मिलेगी। साथ ही आरोग्यता का वरदान मिलेगा।
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