दुर्ग : जिले से सामने आया यह मामला सिर्फ एक पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो कानून की रखवाली के नाम पर भरोसा मांगता है। चोरी के सोने की जांच की जिम्मेदारी जिस महिला हेड कांस्टेबल को सौंपी गई थी, वही सोना हड़पने की आरोपी बन गई। अब वही महिला सलाखों के पीछे है—और जेल की चारदीवारी के भीतर उसने एक बच्चे को जन्म दिया है।
मामला भिलाई नगर के सिंधिया नगर क्षेत्र का है। जुलाई 2022 में सोनाली द्विवेदी के घर से सोने के गहनों की चोरी हुई थी। मोहन नगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच महिला हेड कांस्टेबल मोनिका गुप्ता को सौंपी। जांच के दौरान जून 2023 में आरोपी पीतांबर राव की गिरफ्तारी हुई और उसके पास से करीब 79 ग्राम सोना बरामद किया गया।
नियमों के मुताबिक जब्त सोना थाने के मालखाने में जमा होना था, लेकिन आरोप है कि यह कभी वहां पहुंचा ही नहीं। पीड़िता ने जब कोर्ट के जरिए अपने गहने वापस पाने की कोशिश की और थाने पहुंची, तब जाकर यह खुलासा हुआ कि जब्त सोना रिकॉर्ड से गायब है।
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वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बावजूद गहने वापस नहीं किए गए। इसके बाद मार्च 2025 में मोनिका गुप्ता के खिलाफ अमानत में खयानत और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। मामला दर्ज होते ही वह फरार हो गई।
करीब एक साल बाद, 2 फरवरी 2026 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा। गिरफ्तारी के वक्त वह नौ महीने की गर्भवती थी। जेल प्रशासन ने मानवीय आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
मोनिका ने एक बेटे को जन्म दिया।
कानून के मुताबिक यह नवजात अब अपनी मां के साथ जेल में ही रहेगा। अपराध मां ने किया, लेकिन सजा की परछाई एक ऐसे बच्चे पर भी पड़ गई, जिसने दुनिया में आंखें ही सलाखों के बीच खोलीं।
इस मामले ने पुलिस व्यवस्था, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वर्दी पर लगे इस दाग की कीमत क्या सिर्फ एक गिरफ्तारी है, या सिस्टम को भी इसका जवाब देना होगा—यह सवाल अब और तेज हो गया है।
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