नगरी : नगर पंचायत नगरी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर समर्पण दिवस मनाया गया तथा माल्यार्पण कार्यक्रम एवं चौक सौंदर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन समारोह आयोजित किया गया। लगभग 8 लाख रुपये की अनुमानित लागत से पंडित दीनदयाल चौक का सौंदर्यीकरण एवं प्रतिमा परिसर का विकास कार्य किया जाएगा।कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के समस्त कार्यकर्ताओं द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर “पंडित दीनदयाल उपाध्याय अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों से पूरा वार्ड गूंज उठा। तत्पश्चात उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों के करकमलों से विधिवत भूमिपूजन संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय किसान मोर्चा मंत्री पिंकी शिवराज शाह , पूर्व विधायक श्रवण मरकाम , नगर पंचायत नगरी के अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा , मंडल महामंत्री रूपेंद्र साहू जनपद उपाध्यक्ष हृदय साहू जिला पंचायत सभापति अजय ध्रुव जनपद सभापति प्रेमलता नागवंशी जी सरपंच नरसिंह मरकाम जीजी पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नागेंद्र शुक्ला , जिला मीडिया प्रभारी राम गोपाल साहू जीपूर्व सरपंच महेंद्र नेताम लोक निर्माण विभाग सभापति अश्वनी निषाद राजस्व सभापति विनीता कोठारी चेलेश्वरी साहू अंबिका ध्रुव डागेश्वरी साहू राजा पवार देवचरण ध्रुव तथा पूर्व जनपद अध्यक्ष दिनेश्वरी नेताम युवा मोर्चा महामंत्री यश साहू योगेश साहू जी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।
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राष्ट्रीय किसान मोर्चा मंत्री पिंकी शिवराज शाह ने अपने उद्बोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, संघर्ष एवं राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के कारण उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन व्यतीत किया। अनेक संघर्षों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का ध्येय बनाया।
वे भारतीय जनसंघ के प्रमुख स्तंभों में से एक थे तथा “एकात्म मानववाद” के प्रणेता थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं विचारधारा पर आधारित राजनीतिक दर्शन प्रस्तुत किया, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की भावना पर आधारित था।पंडित जी ने संगठन को मजबूत करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति उनके जीवन की पहचान रही।
11 फरवरी 1968 को उनकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई, परंतु उनके विचार आज भी देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करते हैं।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नगर पंचायत नगरी के अध्यक्ष एवं मंडल अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों पर चलकर ही राष्ट्र सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकता है। चौक के सौंदर्यीकरण से नगर की शोभा बढ़ेगी तथा आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों से प्रेरणा ले सकेंगी।
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