सोशल मीडिया पर सामने आया एक वीडियो इंसानियत को झकझोर देने वाला है. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आई इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि एक प्राइवेट स्कूल में होमवर्क न करने की "गलती" पर एक मासूम बच्चे को पेड़ से लटका दिया गया.
यह कोई सजा नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैवानियत है. सवाल यह है कि क्या यही पढ़ाने का तरीका है, या फिर बच्चों को डर और हिंसा की ट्रेंडिंग दी जा रही है?
जिस उम्र में बच्चों को प्यार, समझ और सीखने का सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, उसी उम्र में उन्हें डर और दरिंदगी का सामना करना पड़ रहा है. स्कूल, जो ज्ञान और संस्कार देने का स्थान होता है, अगर वहीं अत्याचार होने लगे तो यह समाज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. यह घटना साफ दिखाती है कि कुछ लोग शिक्षा और अनुशासन के नाम पर हैवानियत को ठहराने की कोशिश कर रहे हैं.
होमवर्क नहीं किया,इसलिए इंसानियत टांग दी गई
— KUNDAN PATEL (@KUNDAN00PATEL)February 10, 2026
ये पढ़ाने का तरीका है या हैवानियत की ट्रेनिंग..🤯
होमवर्क नहीं किया तो पेड़ से लटका दिया गया
ये शिक्षा नहीं,मानसिक और शारीरिक हिंसा है..
स्कूल सीखने की जगह होते हैं,डर और दरिंदगी
के अड्डे नहीं...🥹
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में एक…pic.twitter.com/meN9PpfIVO
क्या है पूरा मामला
वीडियो के मुताबिक, सूरजपुर के एक निजी स्कूल में बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था. इसी बात से नाराज़ होकर शिक्षक ने उसे पेड़ से लटका दिया. यह सजा इतनी अमानवीय थी कि बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता था. वीडियो वायरल होने के बाद लोग गुस्से और दुख से भरे हुए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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क्या यही है शिक्षा का मतलब?
होमवर्क न करना कोई जुर्म नहीं है कि किसी बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से दंडित किया जाए. पढ़ाई का मकसद बच्चों को समझदार बनाना, उनकी सोच को निखारना और उन्हें बेहतर इंसान बनाना होता है, न कि उनके मन में डर बैठाना. इस तरह की घटनाएं बच्चों के कोमल मन पर ऐसे घाव छोड़ जाती हैं, जिनका असर लंबे समय तक बना रहता है.
बच्चों पर पड़ता है गहरा मानसिक असर
घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ नजर आ रहा है. एक यूजर ने लिखा, 'अगर इस तरह का टॉर्चर करेंगे तो बच्चा सीखने के बजाय मानसिक रूप से कमजोर हो जाएगा. होमवर्क नहीं किया है तो समझाने के और भी तरीके हैं. ऐसे अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.' एक अन्य यूजर ने लिखा, 'यह घटना याद दिलाती है कि शिक्षा का मतलब डर नहीं, बल्कि समझ और इंसानियत सिखाना है. हिंसा किसी भी हाल में जायज़ नहीं.'
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