कैनरा बैंक खाते में करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप, FIR दर्ज

कैनरा बैंक खाते में करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप, FIR दर्ज

रायपुर :  छत्तीसगढ़ में एक गंभीर बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें कैनरा बैंक के खाते में अवैध हस्तक्षेप, फर्जी हस्ताक्षर और अनधिकृत लेनदेन का आरोप लगाया गया है। भिलाई नगर, जिला दुर्ग की रहने वाली आकांक्षा सिन्हा ने अपने कैनरा बैंक खाते से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सिविल लाइंस थाना, रायपुर में आवेदन प्रस्तुत किया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी मुकुंद सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।

आवेदिका आकांक्षा सिन्हा के अनुसार उनका कैनरा बैंक खाता वर्ष 2016 में खोला गया था, जबकि उस समय वे नागपुर में निवास भी नहीं कर रही थीं। उन्होंने बताया कि उनका विवाह 12 दिसंबर 2016 को हुआ था और उसके बाद ही वे नागपुर शिफ्ट हुईं, जबकि खाता जून 2016 में खोला गया। आवेदिका का आरोप है कि वे कभी भी बैंक शाखा जाकर खाता खोलने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुईं। खाता खोलने का फॉर्म बैंक अधिकारी मुकुंद सिंह उनके घर लेकर आए थे और वहीं हस्ताक्षर कराए गए। आवेदिका ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में उनके खाते की ऑपरेटिंग इंस्ट्रक्शन उनकी जानकारी, सहमति और हस्ताक्षर के बिना अवैध रूप से बदलकर सिंगल ऑपरेशन कर दी गई। बैंक द्वारा लिखित रूप से यह स्वीकार किया गया है कि इस परिवर्तन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज, हस्ताक्षर या लिखित अनुरोध उपलब्ध नहीं है। इसे बैंकिंग नियमों का उल्लंघन और कर्मचारियों द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग का मामला बताया गया है।

शिकायत के अनुसार वर्ष 2016 से 2022 के बीच उनके खाते से लाखों रुपये की NEFT, RTGS, कैश विदड्रॉल और एटीएम ट्रांजैक्शन हुईं, जबकि आवेदिका का कहना है कि उन्होंने कभी किसी NEFT/RTGS स्लिप पर हस्ताक्षर नहीं किए, न ही किसी शाखा में जाकर चेक, पासबुक, एटीएम या कार्ड प्राप्त किया। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर लेनदेन को बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और सिस्टम एक्सेस के दुरुपयोग से जोड़ा जा रहा है। आवेदिका ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारी मुकुंद सिंह ने बिना उनकी जानकारी और हस्ताक्षर के स्वयं को उनके खाते का नामिनी बना लिया। इस संबंध में भी बैंक के पास कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताया गया है। इसके अलावा खाते का आधिकारिक ट्रांसफर वर्ष 2020 के बाद राजीव नगर शाखा, रायपुर में हुआ, जबकि उससे पहले भी विभिन्न शाखाओं से खाते का संचालन होने का दावा किया गया है।

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शिकायत के अनुसार वर्ष 2016 से 2022 के बीच उनके खाते से लाखों रुपये की NEFT, RTGS, कैश विदड्रॉल और एटीएम ट्रांजैक्शन हुईं, जबकि आवेदिका का कहना है कि उन्होंने कभी किसी NEFT/RTGS स्लिप पर हस्ताक्षर नहीं किए, न ही किसी शाखा में जाकर चेक, पासबुक, एटीएम या कार्ड प्राप्त किया। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर लेनदेन को बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और सिस्टम एक्सेस के दुरुपयोग से जोड़ा जा रहा है। आवेदिका ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारी मुकुंद सिंह ने बिना उनकी जानकारी और हस्ताक्षर के स्वयं को उनके खाते का नामिनी बना लिया। इस संबंध में भी बैंक के पास कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताया गया है। इसके अलावा खाते का आधिकारिक ट्रांसफर वर्ष 2020 के बाद राजीव नगर शाखा, रायपुर में हुआ, जबकि उससे पहले भी विभिन्न शाखाओं से खाते का संचालन होने का दावा किया गया है।








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