परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के त्रिमूर्ति भवन, ओम शांति कॉलोनी (नवापारा) में “आध्यात्मिकता द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा” विषय पर भव्य संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। त्रिवेणी संगम की पुण्य भूमि राजिम कल्प कुंभ में पधारे देशभर के साधु-संतों एवं महामंडलेश्वरों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ शिव ध्वज फहराकर किया गया। संस्थान की संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने दिव्य उद्बोधन के साथ सभी संतों का आत्मीय स्वागत किया। माउंट आबू से पधारे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों की स्थापना और दैवीय संस्कृति के पुनर्स्थापन का समय आ गया है। वर्तमान समय परिवर्तन का काल है, जब शिव पिता परमात्मा द्वारा दैवीय संस्कृति की स्थापना का दिव्य कार्य संपन्न हो रहा है।
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अकोला (महाराष्ट्र) से आई राजयोग शिक्षिका योगशक्ति ब्रह्माकुमारी रुक्मिणी दीदी ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि गीता जीवन जीने की कला सिखाती है, जो आत्मज्ञान पर आधारित है और यही सनातन संस्कृति की मूल आत्मा है। राजनांदगांव से आई गुरु सुमरिन माई ने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है, आवश्यकता है उसे सही दिशा देने की। समाज सुधार की पहली सीढ़ी परिवार है, इसलिए पहले परिवारों में संस्कार जागृत करना आवश्यक है।महामंडलेश्वर अक्रिय जी महाराज ने भारतीय संस्कृति के सम्मान और बच्चों को भारतीय परंपराओं की जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिकता ही सनातन संस्कृति की जागृति का मूल आधार है। ब्रह्माकुमारीज का संदेश “पवित्रता प्रसन्नता की जननी है” जीवन में प्रेम, शांति, सुख और सहयोग की भावना को स्वतः विकसित करता है।
स्वामी अखिलेश्वरानंद जी ने कहा कि पाश्चात्य प्रभाव के कारण हम अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य के भीतर संस्कारों का पुनर्जागरण हो। भारत ही वह भूमि है जहाँ सनातन संस्कृति पर गंभीर चिंतन संभव है, और ब्रह्माकुमारी बहनों की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। इंदौर से पधारे ब्रह्माकुमार आशीष गुप्ता ने राजिम कुंभ कल्प मेला की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि हम सभी सनातन की छत्रछाया में हैं और सनातन मूल्यों के आधार पर ही स्वर्णिम भारत की पुनः स्थापना संभव है।सभा को संबोधित करते हुए सभी संतों ने एक स्वर में आध्यात्मिकता को सनातन संस्कृति की रक्षा और पुनर्जागरण का मूल मंत्र बताया। आयोजन के लिए संतों एवं महामंडलेश्वरों ने ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी एवं ब्रह्माकुमार नारायण भाई को साधुवाद दिया।
इस अवसर पर राजिम विधायक रोहित साहू ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने संतों के सानिध्य को क्षेत्र के लिए सौभाग्य बताया।महाशिवरात्रि के अवसर पर परमपिता परमात्मा शिव बाबा के अवतरण दिवस की स्मृति में दीप प्रज्वलन एवं केक कटिंग की गई। “परमात्म साक्षात्कार मेरा बाबा आ गया” गीत के साथ शिव ध्वज लहराकर श्रद्धालु आनंदित और मंत्रमुग्ध हो उठे। सम्मेलन में राजिम कुंभ कल्प मेला में पहुंचे सैकड़ों साधु-संतों एवं संस्थान के सदस्यगणों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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