रबी सीजन में गेहूं की फसल जब बढ़वार तक पहुंच चुकी होती है तब किसानों के सामने सबसे अहम सवाल यही होता है कि अब पैदावार को कैसे और बेहतर किया जाए. इस समय खेत में की गई सही टॉप ड्रेसिंग पूरे सीजन का खेल बदल सकती है. पौधों में तेजी से कल्ले निकलना, तने का मजबूत होना और बालियों में दाने भरपूर आना जैसे मामले इसी दौर की देखभाल पर निर्भर करता है. कई किसान मानते हैं कि पहली सिंचाई के बाद अगर पौधों को सही पोषण मिल जाए तो फसल की हरियाली और उत्पादन दोनों में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है. इसी कड़ी में एक आसान और किफायती उपाय सामने आया है जिसे अपनाकर किसान अपनी गेहूं की फसल को सचमुच लहलहाता हुआ देख सकते हैं.
पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने बताया कि गेहूं की बुवाई या रोपाई के लगभग 21 से 30 दिन बाद का समय टॉप ड्रेसिंग के लिए सबसे उपयुक्त होता है. यह वही समय होता है जब पौधे तेजी से कल्ले बना रहे होते हैं और उन्हें अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है. अगर इस समय खेत में सिर्फ साधारण यूरिया के बजाय यूरिया के साथ कुछ जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलाकर डाले जाएं तो फसल की बढ़वार में साफ फर्क नजर आता है. इससे पौधों का रंग गहरा हरा होता है, तना मजबूत बनता है और आगे चलकर बालियों में दाने भी ज्यादा भरते हैं.
यूरिया के साथ मिलाएं ये तीन विकल्प
किसान यूरिया के साथ जेडन सल्फ, चिलामिन गोल्ड या एग्रोमिन मैक्स में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं. जेडन सल्फ सल्फर की कमी को पूरा करता है, जिससे पौधों में प्रोटीन बनने की प्रक्रिया तेज होती है. चिलामिन गोल्ड में जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं जो पौधों की जड़ों और पत्तियों को मजबूती देते हैं. वहीं एग्रोमिन मैक्स में कई सूक्ष्म तत्वों का संतुलित मिश्रण होता है जो संपूर्ण विकास में मदद करता है. इन तीनों में से कोई एक विकल्प चुनकर किसान अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं.
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मात्रा और लागत भी किसानों के अनुकूल
जेडन सल्फ की कीमत लगभग 500 रुपए प्रति एकड़ आती है और इसे 2 किलो निकालकर एक बोरी यूरिया के साथ मिलाकर खेत में डाला जाता है. एग्रोमिन मैक्स करीब 750 रुपए प्रति एकड़ पड़ता है जिसे 1 किलो एक बोरी यूरिया में मिलाया जाता है. वहीं चिलामिन गोल्ड की कीमत भी लगभग 500 रुपए प्रति एकड़ होती है और इसमें से करीब एक पाव मात्रा एक बोरी यूरिया के साथ मिलाकर छिड़काव किया जाता है. खास बात यह है कि इन सभी विकल्पों की लागत ज्यादा नहीं है और छोटे किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं.
सबसे पहले करें ये काम
इस मिक्सचर को डालने के कुछ ही दिनों में पौधों की हरियाली बढ़ने लगती है और खेत में एक समान बढ़वार दिखाई देने लगती है. जिन खेतों में पोषक तत्वों की कमी होती है वहां इसका असर और भी ज्यादा नजर आता है. हालांकि किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि टॉप ड्रेसिंग के समय मिट्टी में नमी होनी चाहिए ताकि पोषक तत्व ठीक से घुलकर जड़ों तक पहुंच सकें. बहुत ज्यादा मात्रा में खाद डालने से बचें और बताई गई मात्रा का ही पालन करें.
बेहतर पोषण से बढ़ेगी पैदावार
कुल मिलाकर गेहूं की फसल के इस नाजुक लेकिन अहम चरण में अगर किसान यूरिया के साथ सही माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलाकर खेत में डाल दें तो फसल की सेहत और पैदावार दोनों में शानदार सुधार हो सकता है. यह उपाय न सिर्फ किफायती है बल्कि अपनाने में भी बेहद आसान है. सही समय पर सही पोषण देकर किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं और इस रबी सीजन में बेहतर उत्पादन की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं.
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