बिहार के अररिया जिले में समय के साथ किसानों की खेती की सोच भी बदल रही है. अब किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहकर सब्जी उत्पादन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है. पारंपरिक खेती में लागत और जोखिम अधिक होने के कारण किसान अब वैकल्पिक और कम अवधि वाली फसलों पर ध्यान दे रहे हैं.
जिले में लौकी, कद्दू, खीरा, झींगा, साग, लाल साग, टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है. खासकर फूलगोभी की खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है, क्योंकि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है.
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90 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
अररिया जिले के छररा पट्टी गांव के किसान घोलटू कुमार एक एकड़ जमीन में फूलगोभी की खेती करते हैं, उन्होंने बताया कि फूलगोभी की फसल 70 से 90 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है। इसके बाद इसे काटकर बाजार में बेच दिया जाता है. घोलटू कुमार के अनुसार, वर्तमान में फूलगोभी 25 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। वे अपनी उपज बाइक के माध्यम से स्थानीय बाजार और बड़ी मंडियों में ले जाकर सीधे दुकानदारों को बेचते हैं। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है।
सीजन में 2 लाख रुपये तक की कमाई
किसान घोलटू कुमार ने बताया कि एक से दो एकड़ जमीन में सब्जी की खेती कर वे सालाना 3 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर लेते हैं. अलग-अलग सीजन में अलग-अलग सब्जियों की खेती की जाती है, उन्होंने कहा कि केवल फूलगोभी की खेती से ही एक सीजन में लगभग 2 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.
स्थानीय स्तर पर कई किसान अब इसी मॉडल को अपनाकर कम समय में बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। सब्जी की खेती कम अवधि में तैयार होने वाली फसल होने के कारण किसानों के लिए आय का स्थायी और लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
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