सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट और इनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को धोखाधड़ी के मामले में अंतरिम जमानत दे दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने श्वेतांबरी भट्ट को उदयपुर जेल से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को जमानत आदेश पारित करने के लिए कहा है।
देश की शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जमानत आदेश पारित करते समय नियम और शर्तें स्पष्ट रूप से बताई जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया और राजस्थान सरकार को भी 19 फरवरी के लिए नोटिस जारी किया। मुर्डिया, इंदिरा आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर के संस्थापक, जो उदयपुर के रहने वाले हैं।
HC ने जमानत याचिका खारिज की थी
वहीं, राजस्थान हाई कोर्ट ने 31 जनवरी को धोखाधड़ी के मामले में विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को मुंबई में गिरफ्तार किए जाने के बाद उदयपुर लाया गया था और उन्हें सात दिसंबर 2025 को जेल भेजा गया था। उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि इस वक्त आरोपियों को जमानत देना सही नहीं होगा।
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धोखाधड़ी और विश्वासघात का लगा है आरोप
वहीं, अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के बाद ही विक्रम भट्ट को गिरफ्तार किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक फिल्म बनाने के नाम पर ली गई राशि का दुरुपयोग किया गया।
30 करोड़ रुपये की हेरफेर का मामला
शिकायत में आगे कहा गया है कि लगभग 30 करोड़ रुपये की हेरफेर की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भट्ट परिवार ने विभिन्न नामों से फर्जी बिल तैयार किए और शिकायतकर्ता से पैसे ट्रांस्फर करवाए। इन पैसों को कथित तौर पर आरोपियों के निजी खातों में जमा किया गया और उन्होंने इसका इस्तेमाल किया। हालांकि, विक्रम और उनकी पत्नी के अलावा उदयपुर निवासी दिनेश कटारिया और विक्रम भट्ट के मैनेजर महबूब अंसारी को भी राजस्थान पुलिस ने सात दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था।
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