जल्द ही एक-एक कर सात बड़ी खुशखबरियां आपके गांव पहुंचने वाली हैं. इन शुखशबरियों का ऐलान खुद कम्युनिकेशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में किया है. खुशबरियों के ऐलान से पहले उन्होंने बताया कि मोबाइल कंज्यूमर्स की संख्या 2014 में जहां 930 मिलियन थी, वह अब बढ़कर 1.2 अरब हो गई है.वहीं, देश के 92 फीसदी लोग अब मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. 2014 में यह आंकडा सिर्फ 75 फीसदी थी.
उन्होंने बताया कि इंटरनेट कंज्यूमर्स संख्या 2014 में 250 मिलियन थी, जो अब बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है. वहीं, इंटरनेट कंज्यूमर्स की संख्या 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 71.8 प्रतिशत हो गई है. वहीं, ब्रॉडबैंड कंज्यूमर्स की बात करें तो यह संख्या भी 61 मिलियन से बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है. उन्होंने बताया कि देश में ब्रॉडबैंड इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स को एवरेज फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड अब लगभग 61.55 एमबीपीएस हो गई है.
भारटनेट से जुड़ेंगे भारत के सभी ग्राम पंचायत
कम्युनिकेशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद को बताया कि भारटनेट ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाकर कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है. देश की 2.56 लाख ग्राम पंचायतों में से लगभग 2.14 लाख ग्राम पंचायत को भारतनेट तहत ऑनलाइन किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 42,000 करोड़ रुपए है. सरकार की योजना है कि जल्द ही इन सभी गांवों को भारतनेट से जोड़ दिया जाएगा.
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राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के तहत आपको मिलने वाली हैं ये खुशखबरियां
कम्युनिकेशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदन को बताया कि 1 अप्रैल 2025 को लॉन्च किए गए राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 ने सात प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं. इन लक्ष्यों को अगले 14 साल यानी 20230 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. आइए अब जानिए गांवों तक पहुंचने वाली हैं कौन कौन सी खुशखबरियां:
भारतनेट भारत सरकार की एक एम्बिशियस इनिशिएटिव है, जिसका मकसद देश के हर नागरिक तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है. यह प्रोग्राम खासतौर पर रूरल और रिमोट एरियाज में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस कर रहा है. पिछले 11 वर्षों में, भारत ने मोबाइल और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में अनप्रेसिडेंटेड एक्सपैंशन देखा है, जिसने एक हिस्टोरिक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को स्पीड दी है. - ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार मंत्री
लेकिन अभी भी बाकी हैं इन सवालों के जवाब:
[q]दूरसंचार राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) रूल्स, 2024 की करंट स्टेटस क्या है?[/q]
[ans]देश के 36 स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज में से 33 ने टेलीकॉम राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) रूल्स, 2024 को इम्प्लीमेंट कर दिया है. इसका मतलब है कि मेजॉरिटी राज्यों ने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाने के लिए अपडेटेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को एडॉप्ट कर लिया है. हालांकि तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल जैसे कुछ राज्यों में अभी इन रूल्स का इम्प्लीमेंटेशन पेंडिंग है, जिससे वहां नेटवर्क एक्सपेंशन की प्रक्रिया पूरी तरह स्ट्रीमलाइन्ड नहीं हो पाई है.[/ans]
[q]आरओडब्ल्यू एप्लीकेशंस के डिस्पोजल में कितना समय लग रहा है?[/q]
[ans]नेशनल लेवल पर आरओडब्ल्यू एप्लीकेशंस के डिस्पोजल का एवरेज टाइम अब 30.4 दिन रह गया है. पहले की तुलना में यह काफी बड़ा इम्प्रूवमेंट है. फास्टर क्लियरेंस प्रोसेस से फाइबर लेइंग, टावर इंस्टॉलेशन और ओवरऑल टेलीकॉम नेटवर्क एक्सपेंशन की स्पीड सिग्निफिकेंटली बढ़ी है, जिससे ब्रॉडबैंड रोलआउट को मोमेंटम मिला है.[/ans]
[q]तमिलनाडु में आरओडब्ल्यू एप्लीकेशंस की क्या स्थिति है?[/q]
[ans]तमिलनाडु में आरओडब्ल्यू एप्लीकेशंस के डिस्पोजल का एवरेज टाइम लगभग 85 दिन है. यह नेशनल एवरेज 30.4 दिन की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा है. हाईयर प्रोसेसिंग टाइम की वजह से वहां टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपेंशन अपेक्षाकृत स्लो हो सकता है, जिससे ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी रोलआउट की स्पीड प्रभावित हो सकती है.[/ans]
[q]राज्यों के कोऑपरेशन पर सरकार का क्या स्टैंड है?[/q]
[ans]कम्युनिकेशंस मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एम्फेसाइज किया है कि राइट ऑफ वे रेगुलेशंस और ऑनलाइन पोर्टल्स के इफेक्टिव इम्प्लीमेंटेशन में राज्यों का कोऑपरेशन बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि अगर सभी राज्य प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाएं, तो ब्रॉडबैंड एक्सपेंशन की स्पीड नोटिसेबली बढ़ेगी और सिटिजन्स को डिजिटल सर्विसेज का टाइमली बेनिफिट मिलेगा.[/ans]
[q]2030 ब्रॉडबैंड टार्गेट्स को लेकर सरकार की स्ट्रैटेजी क्या है?[/q]
[ans]सरकार का फोकस 2030 तक निर्धारित ब्रॉडबैंड टार्गेट्स अचीव करने पर है. इसके लिए सेंटर और स्टेट्स के बीच कंटीन्यूअस कोऑर्डिनेशन और पॉलिसी अलाइनमेंट को क्रिटिकल माना गया है. खासतौर पर रूरल और रिमोट एरियाज में इन्क्लूसिव डिजिटल डेवलपमेंट सुनिश्चित करने के लिए स्ट्रॉन्ग सेंटर-स्टेट पार्टनरशिप को की फैक्टर बताया गया है.
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