पंजाब की इन मिठाइयों में घुली प्यार और परंपरा की कहानी

पंजाब की इन मिठाइयों में घुली प्यार और परंपरा की कहानी

नई दिल्ली : पंजाब की मिट्टी में फसलें ही नहीं उगतीं, बल्कि स्वाद, परंपरा और अपनापन भी जन्म लेता है। यहां की मिठाइयां केवल खाने की चीज नहीं, बल्कि सर्दी की धूप, त्योहारों की रौनक और परिवार के साथ बिताए पलों की मीठी यादें हैं। ये संस्कृति, मेहनत, मौसम और रिश्तों की कहानी कहती हैं। वैदिक काल से लेकर मुगल दौर और आज के समय तक, ये मिठाइयां पंजाब की उस मिठास को जिंदा रखती हैं, जो सिर्फ जुबान पर नहीं, बल्कि दिल में बस जाती है।

मिट्टी के बर्तन में जमी परंपरा

फिरनी एक ऐसी मिठाई है, जो शांति, ठहराव और सादगी का एहसास कराती है। इसका इतिहास भी मुगल काल से जुड़ा माना जाता है। दूध और दरदरे पिसे चावल से बनी फिरनी, खीर से अलग पहचान रखती है। पंजाब में फिरनी को खास तौर पर मिट्टी के बर्तनों (शिकोरे) में जमाकर परोसा जाता है। मिट्टी की सौंधी खुशबू फिरनी के स्वाद को और भी खास बना देती है। शादियों, धार्मिक अवसरों और त्योहारों पर फिरनी परोसना सम्मान और अपनापन दिखाने का तरीका माना जाता है। मेहमान को फिरनी परोसना, दिल से किया गया स्वागत माना जाता है।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है

सेहत की मिठास

भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्रिय मिठाइयों में से एक है गाजर का हलवा। माना जाता है कि इसकी शुरुआत मुगल काल में हुई, जब शाही रसोइयों ने फारसी और मध्य एशियाई मिठाइयों से प्रेरणा लेकर भारतीय स्वाद के अनुसार नए प्रयोग किए। उत्तर भारत और खासकर पंजाब में लाल देसी गाजर की भरपूर पैदावार होती है। ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए घी, दूध और मेवों से बनी मिठाइयां जरूरी मानी जाती थीं और गाजर का हलवा इस जरूरत पर पूरी तरह खरा उतरता था। धीमी आंच पर पकता हुआ हलवा, घर में फैलती उसकी सुगंध और ऊपर से डला देसी घी, शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां पर सीजन में गाजर का हलवा न बनता हो।

मेहनत भरे जीवन की मिठास

पिन्नी पंजाब की सबसे पुरानी और सादी मिठाइयों में से एक है। इसका जन्म उस दौर में हुआ, जब पंजाब पूरी तरह कृषि प्रधान था और लोगों को दिनभर खेतों में मेहनत करनी पड़ती थी। उन्हें ऐसी मिठाई चाहिए थी जो ऊर्जा दे, शरीर को गर्म रखे और लंबे समय तक खराब न हो। घी, गेहूं का आटा या सूजी और गुड़ से बनी पिन्नी इसी जरूरत का नतीजा है। इसे शादियों, बच्चे के जन्म और गुरुपर्व जैसे शुभ अवसरों पर बांटा जाता है। आज भले ही इसमें सूखे मेवे, इलायची और केसर जुड़ गए हों, लेकिन इसका आत्मा अब भी वही सादगी और अपनापन है।

खस्ता परतों में बसी खुशियां

पंजाब की पारंपरिक मिठाई पतीसा अपनी खस्ता और परतदार बनावट के लिए जानी जाती है। घी, आटा और चीनी /गुड़ से बनी यह मिठाई काफी धैर्य और मेहनत मांगती है। पंजाब में पतीसा को त्योहारों और शादियों में खूब खाया जाता है। यह मिठाई लंबे समय तक सुरक्षित रहती थी, इसलिए मेहमानों और बच्चों के लिए खास तौर पर बनाई जाती थी। समय के साथ इसके कई रूप सामने आए, लेकिन इसका पारंपरिक स्वाद आज भी वही है।










You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments