सरगुजा : धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं का महापर्व शिवरात्रि 15 फरवरी दिन रविवार को नगर लखनपुर सहित आसपास इलाके में उत्साह के साथ मनाया गया। महाशिवरात्रि पर्व पर शिवालयों में सुबह से भक्तों की भीड़ देखी गई। लखनपुर के प्राचीन स्वयं- भू -शिवमन्दिर, कुंवरपुर जूनाडीह सीमा पर स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर रेणुका के तट पर स्थित सरगुजा जिले के प्रसिद्ध महर्षि जमदग्नि के तपोभूमि देवगढ़ धाम अर्धनारीश्वर मंदिर एवं महेशपुर धाम शिवमन्दिर के अलावा क्षेत्र के तमाम शिवालयों में शिवभक्तों ने अपने आराध्य भगवान शिव शंकर के पूजा अर्चना किये। शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा शिव मंदिर हर हर महादेव के उद्घोष से गुजायेमान रहे। शिव भक्त मंदिरो में पहुंच भोलेनाथ माता पार्वती को प्रसन्न करने जलाभिषेक दुग्धाभिषेक के साथ बेलपत्र फूल फल धूप-दीप आदि अर्पित कर दर्शन पूजन किये। कहा जाता है महाशिवरात्रि पर ध्यान योग करने से मानसिक सुख की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व मनाई जाती है।इसके दूसरे पहलू है कि संसार के कल्याणार्थ समुद्र मंथन से निकले हलाहल अर्थात विष का पान भगवान शिवशंकर ने शिवरात्रि के दिन किया था।
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इस दिन शिवलिंग की उत्पत्ति होने की बात भी पुराणों में बताई गई है। उपनिषदों में वर्णित है कि शिवलिंग में सभी देवी-देवताओं की वास है सम्पूर्ण सृष्टि समाई हुई है। यही वजह है कि आदिकाल से महाशिवरात्रि पावन पर्व पर शिवलिंग और महादेव की पूजा किये जाने की परंपरागत चली आ रही है। शिव लिंग की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही इस दिन शिवपूजन मंत्र जप आदि करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा बरसती है। उनके चौखट से कोई खाली नहीं जाता मांगने वाले की सभी मुरादें पूरी होती है। फिलहाल दर्शनार्थियों ने देवगढ़ धाम एवं महेशपुर धाम में लगने वाली तीन दिवसीय मेले का लुत्फ उठाया। साथ ही रामगढ़ ग्राम जेजगा स्थित लोक देवी रामपुरहहीन माई के शक्तिपीठ तथा दूसरे देवालयों में पहुंच माथा टेक आशिर्वाद प्राप्त किये। क्षेत्र में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया।
वातावरण भक्तिमय बना रहा। शिवशक्ति के आराधना में शिवभक्त डुबे रहे। मंदिर देवालयों में महारूद्र यज्ञ शिव पुराण कथा,अखंड रामायण भजन कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन भी हुये और आगे भी जारी है। श्रद्धालुओं ने जगह जगह भंडारे लगा कर शिव भक्तों को भोजन प्रसाद वितरित किये। कुछ शिव भक्तों ने देवगढ़ एवं महेशपुर धाम के अतीत के बारे में जानकारी दी। बताया कि -- राजतंत्र काल आठवीं दसवीं शताब्दी में इस धार्मिक स्थलों के अस्तित्व में आने का उल्लेख मिलता है। एतिहासिक और प्राचीनतम सभ्यताओं से सम्बंध है।वर्तमान में शासन प्रशासन स्तर से इन दर्शनीय स्थलों को बनाने संवारने के कवायद जारी है।
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