शहरों में बढ़ती आबादी और सीमित जगह के बीच अब लोगों का रुझान टेरेस गार्डनिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है. खास बात यह है कि अब सिर्फ फूल-पौधे ही नहीं, बल्कि फलदार पौधे भी आसानी से गमलों में उगाए जा सकते हैं. इसी में ड्वॉर्फ ग्राफ्टेड ऑरेंज (नागपुर, माल्टा) की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. यह खास किस्म बड़े संतरे के पेड़ों को छोटे आकार में तैयार करके गमलों और टेरेस के लिए उपयुक्त है.
ड्वॉर्फ ग्राफ्टेड तकनीक के जरिए नागपुर संतरा और माल्टा संतरा जैसी नामी किस्मों को छोटे कद के पौधों पर ग्राफ्ट किया जाता है. इस तकनीक से पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं बढ़ते, जिससे उनकी देखभाल और कटाई आसान हो जाती है. छोटे आकार के बावजूद इन पौधों से मिलने वाले फल पारंपरिक किस्मों जैसे ही स्वादिष्ट, रसीले और गुणवत्तापूर्ण होते हैं. यानी स्वाद, सुगंध और पोषक तत्वों में कोई समझौता नहीं होता. कम जगह में अधिक उत्पादन, कम लागत में बेहतर पैदावार और आसान प्रबंधन के कारण यह तकनीक किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है.
नागपुरी संतरा अपनी मिठास और रसीलेपन के लिए जाना जाता है, जबकि माल्टा संतरा हल्की खटास और ताजगी भरे स्वाद के लिए पसंद किया जाता है.पहले इन किस्मों को उगाने के लिए बड़े खेत या खुली जमीन की जरूरत होती थी, लेकिन अब 18 से 24 इंच के बड़े गमले में भी इन्हें आसानी से लगाया जा सकता है. यही वजह है कि फ्लैट और अपार्टमेंट में रहने वाले लोग भी अब संतरे का पौधा अपने घर में लगा पा रहे हैं.
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ड्वॉर्फ ग्राफ्टेड संतरे का पौधा सामान्य रूप से 3 से 5 फीट तक ही बढ़ता है, जिससे इसे घर, छत या बालकनी में आसानी से उगाया जा सकता है. सही धूप, नियमित सिंचाई और समय-समय पर खाद देने पर यह पौधा एक से डेढ़ साल में फल देना शुरू कर देता है. विशेषज्ञों के अनुसार पौधे को प्रतिदिन कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलना आवश्यक है. इसके साथ ही जल निकासी वाला गमला होना चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके और जड़ों में सड़न की समस्या न हो.
देखभाल की दृष्टि से ड्वॉर्फ ग्राफ्टेड संतरे के पौधों में ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती. महीने में एक बार ऑर्गेनिक खाद, जैसे गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट देने से पौधे की वृद्धि बेहतर होती है. कीटों और रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर नीम तेल का छिड़काव करना लाभकारी रहता है. उचित देखभाल मिलने पर ये ग्राफ्टेड पौधे जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं. इनसे मिलने वाले फल आकार में अच्छे, स्वाद में बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण होते हैं, जिससे कम जगह में भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है.
शहरों में बढ़ते प्रदूषण और मिलावटी फलों के इस दौर में घर पर उगाया गया संतरा स्वास्थ्य के लिए बेहतर और सुरक्षित विकल्प बनता जा रहा है. अपने घर में उगे ताजे, रसायन मुक्त फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए लाभकारी होते हैं. इससे पोषण के साथ-साथ शुद्धता की भी गारंटी मिलती है. इसके अलावा संतरे का यह पौधा टेरेस, बालकनी या आंगन की सुंदरता को भी बढ़ाता है और घर के माहौल को हरियाली से भर देता है, जिससे मानसिक सुकून और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.
अगर आपके पास खुली जमीन नहीं है, लेकिन फलदार पौधे उगाने का शौक है, तो ड्वॉर्फ ग्राफ्टेड नागपुर और माल्टा संतरा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. थोड़ी सी देखभाल, सही आकार के गमले, नियमित पानी और पर्याप्त धूप के साथ आप अपने घर की छत या बालकनी पर ही ताजे और रसीले संतरे उगा सकते हैं. यह पौधा कम जगह में आसानी से पनपता है और जल्दी फल देना शुरू कर देता है. इससे न केवल ताजे फलों का आनंद मिलता है, बल्कि घर की हरियाली और सुंदरता भी बढ़ती है.
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